नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में इस समय त्योहारी सीजन के बीच गजब की हलचल देखने को मिल रही है। दिवाली से ठीक पहले बाजार में ऐसी आतिशबाजी हुई कि निवेशकों की आंखें खुली की खुली रह गईं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 1500 से ज्यादा अंकों का भारी उछाल लेकर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी बारह दिन के लंबे अंतराल के बाद तेज़ी दिखाते हुए 23000 के जादुई आंकड़े को पार कर गया। बाजार की इस अचानक आई जोरदार तेजी से शुरुआती घंटों में हर तरफ खुशी का माहौल बन गया।
दुकानों और दफ्तरों में दीये जलने से पहले ही दलाल स्ट्रीट पर पैसों की बरसात होने लगी थी। आज के इस कारोबारी सत्र में बाजार खुलते ही शेयरों की कीमतों में लगातार बढ़त दर्ज की जाने लगी। देखते ही देखते सेंसेक्स ने ग्यारह सौ अंकों का सफर तय किया और दोपहर होते-होते यह बढ़त पंद्रह सौ अंकों के पार चली गई। आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस तेजी के पीछे विदेशी निवेशकों का रुख और घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बड़ी वजह रही है। पिछले कुछ हफ्तों से सुस्त पड़े बाजार में इस अचानक आई तेजी ने छोटे और बड़े दोनों निवेशकों को हैरान कर दिया है।
सबसे आगे निकले आईटी स्टॉक और बड़ी कंपनियां
इस पूरी तेजी में सबसे बड़ा फायदा सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर के शेयरों को मिला। टेक कंपनियों के शेयरों में लिवाली इतनी तेज थी कि उन्होंने बाकी सभी सेक्टरों को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा देश की बड़ी और दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने भी बाजार को संभाले रखा। जब भी बाजार में कोई बड़ी छलांग लगती है, तो उसमें रिलायंस, टीसीएस और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का हाथ होता है। आज भी इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में हुई भारी खरीद ने सेंसेक्स को ऊपर उठाने में सबसे बड़ा योगदान दिया।
आईटी शेयरों में आई इस अचानक तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले-जुले संकेतों और वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ने की उम्मीदें हैं। अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों के अच्छे प्रदर्शन का असर सीधे तौर पर भारतीय दलाल स्ट्रीट पर भी दिखाई दिया। जानकारों का कहना है कि दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर बन रहे नए समीकरणों ने भारतीय आईटी कंपनियों के लिए रास्ते आसान किए हैं। निवेशकों ने बिना वक्त गंवाए इन शेयरों में जमकर पैसा लगाया और मुनाफा कमाने की होड़ में शामिल हो गए।
भारी उछाल के बावजूद क्यों घटी निवेशकों की दौलत?
सेंसेक्स के पंद्रह सौ अंक और निफ्टी के तेरह हजार के पार जाने के बाद भी एक अजीब स्थिति पैदा हो गई। बाजार के मुख्य आंकड़े तो शानदार हरे निशान में बंद हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई निवेशकों की संपत्ति कम हो गई। इसकी मुख्य वजह यह रही कि यह पूरी तेजी सिर्फ चुनिंदा बड़े शेयरों तक ही सीमित थी। बाजार के छोटे और मझोले शेयरों में आज बिकवाली का दबाव बना रहा। जब मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट आती है, तो आम खुदरा निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसे 'मार्केट ब्रेथ' की कमजोरी कहा जाता है, जहां सूचकांक तो ऊपर भागता है लेकिन शेयरों की कुल संख्या के हिसाब से नुकसान ज्यादा लोगों को होता है। खुदरा निवेशकों ने जिन शेयरों में अपनी गाढ़ी कमाई लगा रखी थी, वे आज सुस्त रहे या लाल निशान में बंद हुए। यही वजह है कि सेंसेक्स की इस रिकॉर्ड तोड़ तेजी के जश्न के बीच भी आम निवेशकों के चेहरों पर पूरी तरह से संतोष या खुशी नहीं दिखाई दी। बाजार के जानकारों की सलाह है कि इस तरह के उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को बेहद संभलकर चलना चाहिए।
दीपावली के इस त्योहारी सीजन में आगे कैसी रहेगी चाल?
दिवाली का त्योहार नजदीक है और ऐसे में शेयर बाजार का यह रुख भविष्य के लिए कई संकेत दे रहा है। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि दीपावली के मौके पर बाजार में शुभ शुरुआत होती है और निवेशक नए सौदे करते हैं। इस बार के आंकड़े भले ही मिले-जुले रहे हों, लेकिन बाजार का मूल आधार मजबूत बना हुआ है। देश के भीतर अर्थव्यवस्था की रफ्तार और कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करेंगे कि आने वाले हफ्तों में बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
द फ्रीलान्स की टीम ने बाजार के कई जानकारों और दलालों से बातचीत की है। सभी का यही कहना है कि निवेशकों को किसी भी तरह की अफवाहों या जल्दबाजी में आकर फैसले लेने से बचना चाहिए। सेंसेक्स के इस बड़े उछाल का आनंद जरूर लें, लेकिन अपने पोर्टफोलियो की सेहत को ध्यान में रखते हुए ही अगला कदम उठाएं। त्योहारी चमक के बीच बाजार के जोखिमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, इसलिए समझदारी के साथ निवेश करना ही सबसे बेहतर रास्ता है।






