कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के तहत अब आवश्यक जरूरतों, आवास संबंधी खर्चों और स्पेशल कंडीशन के लिए पीएफ विड्रॉल की लिमिट तय कर दी गई है। इन नई गाइडलाइन्स का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि सदस्य अपने अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अपनी पीएफ सेविंग का उपयोग कितनी बार कर सकते हैं।
एडवांस विड्रॉल को लेकर ईपीएफओ ने एक स्मार्ट गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार विड्रॉल को तीन कैटेगरी—आवश्यक आवश्यकताएं, आवास संबंधी जरूरतें और स्पेशल कंडीशन में बांटा गया है। हर कैटेगरी के लिए सदस्य की ओर से एडवांस ट्रांजैक्शन की संख्या पर अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की गई हैं, जिससे कर्मचारियों को अपनी भविष्य की जरूरतों के प्रति अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
शिक्षा, विवाह और आवास के लिए तय हुई निकासी की सीमा
संशोधित नियमों के मुताबिक, शिक्षा संबंधी खर्चों के लिए सदस्य अपनी ईपीएफ सदस्यता अवधि के दौरान 10 बार तक निकासी कर सकते हैं। यह प्रावधान सदस्य और उनके परिवार की शिक्षा के खर्चों को कवर करता है। वहीं, विवाह संबंधी खर्चों के लिए अधिकतम 5 बार तक निकासी की अनुमति दी गई है। घर या फ्लैट की खरीद, निर्माण, होम लोन रिपेमेंट और नवीनीकरण जैसी आवास संबंधी जरूरतों के लिए भी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार ही पीएफ निकाला जा सकता है।
मेडिकल इमरजेंसी और 75 फीसदी राशि निकासी के नियम
पहली कैटेगरी के तहत आने वाली आवश्यक जरूरतों में मेडिकल इमरजेंसी शामिल है। इसके तहत पीएफ सदस्य खुद और अपने परिवार के इलाज के लिए बिना किसी तय सीमा के मेडिकल एडवांस निकाल सकते हैं। इसके अलावा, ईपीएफओ के नियमों के अनुसार कर्मचारी सदस्यता के 12 महीने पूरे होने के बाद ब्याज सहित अपनी कुल राशि का 75 फीसदी हिस्सा निकाल सकते हैं, ताकि वित्तीय संकट के समय उन्हें तुरंत राहत मिल सके।
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