नई दिल्ली से हमारे विशेष संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कारोबारियों और टैक्सपेयर्स की नजरें आज होने वाली जीएसटी काउंसिल की महाबैठक पर टिकी हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह बैठक बुलाई गई है, जिसमें कर प्रणाली को और अधिक सरल बनाने पर मंथन चल रहा है। इस बैठक में मुख्य रूप से टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने और नया पंजीकरण कराने के नियमों को आसान बनाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। बैठक में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री और प्रतिनिधि दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल हैं।
आपको बता दें कि यह बैठक मूल रूप से 7 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन और प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर कर दिया गया था। तय कार्यक्रम के अनुसार आज सुबह से ही विज्ञान भवन या निर्धारित बैठक स्थल पर अधिकारियों का मंथन जारी है। इस महाबैठक में टैक्स चोरी रोकने के नाम पर अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनावश्यक कार्रवाई और गिरफ्तारी के अधिकारों को लेकर भी चर्चा होने की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि छोटी-छोटी तकनीकी कमियों के लिए कारोबारियों को सीधे गिरफ्तार करने का हक अधिकारियों से छीना जाना चाहिए, जिस पर आज कोई बड़ा फैसला आ सकता है।
व्यापारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
जीएसटी लागू होने के बाद से ही छोटे और मध्यम व्यापारी लगातार नियमों की जटिलता को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। आज की बैठक का मुख्य एजेंडा ही इन अड़चनों को दूर करना और अनुपालन को बेहद आसान बनाना है। यदि काउंसिल की मुहर लग जाती है तो आने वाले दिनों में टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो जाएगी। पोर्टल पर आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए भी नए सॉफ्टवेयर अपडेट या नियमों में बदलाव की घोषणा की जा सकती है। इससे देश भर के करोड़ों छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, जिन्हें अक्सर कागजी कार्रवाई पूरी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने बैठक से पहले अपने-अपने राज्यों के छोटे उद्योगों और कारोबारियों की समस्याएं केंद्रीय वित्त मंत्रालय के सामने रखी हैं। कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा भी इसी सिलसिले में बेहद अहम माना जा रहा है, जहां वे राज्य के राजस्व हितों और जीएसटी मुआवजे से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए अधिकारी इन प्रस्तावों पर बारीकी से विचार कर रहे हैं। काउंसिल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राजस्व संग्रह भी प्रभावित न हो और कारोबारियों का उत्पीड़न भी पूरी तरह से रुके।
गिरफ्तारी के अधिकारों पर हो सकता है कड़ा नियंत्रण
आज की बैठक का सबसे संवेदनशील और बड़ा मुद्दा जीएसटी अधिकारियों के पास मौजूद गिरफ्तारी और जब्ती के असीमित अधिकार हैं। जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार इस मामले में कुछ कड़े दिशा-निर्देश तय कर सकती है ताकि इन अधिकारों का दुरुपयोग न हो सके। कई व्यापार मंडलों ने पिछले दिनों वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की थी कि बिना पुख्ता और ठोस सबूत के किसी भी व्यापारी को अपराधी की तरह ट्रीट न किया जाए। काउंसिल इस पर एक नया एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है, जिससे अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले टैक्स वकीलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का भी मानना है कि वर्तमान नियमों में कई ऐसे पेंच हैं जिनका खामियाजा ईमानदार टैक्सपेयर्स को भुगतना पड़ता है। रिफंड अटकने की वजह से कई छोटे निर्यातकों की पूंजी बाजार में फंस जाती है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होता है। आज के फैसलों के बाद इस प्रक्रिया के तय समय सीमा के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। द फ्रीलान्स की टीम इस बैठक के हर एक अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही काउंसिल के अंतिम फैसले बाहर आएंगे, हम सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाएंगे।
कानून में सुधार और आगे की रूपरेखा
जीएसटी कानून में समय-समय पर संशोधन करने की प्रक्रिया के तहत आज कई नए प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी व्यापार को आसान बनाने के माहौल को और मजबूत करना है। वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह जरूरी भी है कि घरेलू निवेशकों और व्यापारियों को किसी तरह की कानूनी उलझनों में न फंसना पड़े। आज शाम तक बैठक समाप्त होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन सभी बड़े बदलावों की आधिकारिक घोषणा कर सकती हैं।
आम जनता और खुदरा कारोबारियों के लिए इन बदलावों के क्या मायने होंगे, यह आज के फैसलों की औपचारिक सूची आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगा। लेकिन इतना तय है कि सरकार इस बार कारोबारियों के हित में कुछ कड़े और सकारात्मक कदम उठाने के मूड में दिखाई दे रही है। द फ्रीलान्स की यह ग्राउंड पड़ताल लगातार जारी रहेगी और हम आपको बताएंगे कि जमीन पर इन बदले हुए नियमों का कितना असर देखने को मिलता है।







