नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के शेयर बाजार इन दिनों लगातार बड़े उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। बाजार में मचे इस असमंजस के बीच आम निवेशकों से लेकर बड़े कारोबारियों तक ने अपनी निवेश की रणनीति में बड़ा बदलाव करना शुरू कर दिया है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार आ रही गिरावट और इसके साथ ही सोने की कीमतों में दिख रही भारी तेजी ने बाजार का पूरा समीकरण बदल कर रख दिया है। निवेशकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को आखिर कहां सुरक्षित रखें और कहां से उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
बाजार की इस सुस्ती और अनिश्चितता के माहौल में वित्तीय जानकारों का मानना है कि पारंपरिक निवेश के तरीकों पर लोगों का भरोसा फिर से गहरा रहा है। एक तरफ जहां शेयर बाजार में कमजोरी के चलते लोग म्यूचुअल फंड और सीधे शेयरों में पैसा लगाने से थोड़ा हिचकिचा रहे हैं, वहीं फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी और सुरक्षित बॉन्ड निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं। मनीकंट्रोल हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार के गोता लगाने पर निवेशक अब एफडी और बॉन्ड की ब्याज दरों की बारीकी से तुलना कर रहे हैं ताकि जोखिम को कम से कम रखा जा सके और तय रिटर्न हासिल किया जा सके।
बच्चों के भविष्य के लिए डीमैट अकाउंट का नया चलन
इस बीच, देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स में शुमार ज़ेरोधा की एक दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है, जिसने नए दौर के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आजकल माता-पिता अपने बच्चों के नाम पर डीमैट खाता खुलवाकर निवेश करने लगे हैं। इस नए ट्रेंड के पीछे सोच यह है कि अगर बच्चों के भविष्य की नींव बहुत कम उम्र से ही शेयर बाजार या सुरक्षित फंड्स में लंबी अवधि के निवेश के साथ रखी जाए, तो वे बड़े होने तक एक बड़ा वित्तीय फंड तैयार कर सकेंगे। यह तरीका अभिभावकों को बच्चों की उच्च शिक्षा और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए समय से पहले ही आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद कर रहा है।
दूसरी तरफ, शेयर बाजार के अलावा प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ की दुनिया में भी हलचल कम नहीं हुई है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते निवेशकों के सामने कमाई का एक और मौका आने वाला है क्योंकि बाजार में कई नए आईपीओ दस्तक देने वाले हैं। जो लोग जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं और कंपनियों के शुरुआती शेयरों में पैसा लगाकर बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं, वे इन नए आईपीओ की पूरी सूची और कंपनियों के वित्तीय इतिहास की जांच-पड़ताल करने में जुटे हैं ताकि ऐन वक्त पर सही फैसला लिया जा सके।
नोएडा से मुजफ्फरपुर तक बिहार में उद्योग लगाने की नई लहर
केवल शेयर और बॉन्ड बाजार ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री के क्षेत्र में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दैनिक जागरण की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, अब कारोबारी और बड़े निवेशक केवल महानगरों या नोएडा जैसे पारंपरिक औद्योगिक hubs तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बिहार के मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भी अपने उद्योग स्थापित करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। निवेशकों का कहना है कि सरकार की तरफ से मिल रही नई सुविधाओं, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध श्रम शक्ति और कारोबार के अनुकूल माहौल के कारण अब बिहार निवेश के एक नए और बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
कुल मिलाकर, मौजूदा आर्थिक माहौल यह साफ बता रहा है कि भारतीय निवेशक अब किसी एक रास्ते पर आँख मूंदकर चलने के बजाय विविधता पर जोर दे रहे हैं। चाहे वह सोने की सुरक्षित चमक हो, बच्चों के नाम पर खोला गया नया डीमैट खाता हो, या फिर देश के पिछड़े हिस्सों में नए कारखानों की स्थापना हो, हर जगह सोच समझकर कदम उठाए जा रहे हैं। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह स्पष्ट है कि अनिश्चित बाजार के इस दौर में सूझबूझ और लंबी अवधि की रणनीति ही निवेशकों का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है।





