कोच्चि/ग्राउंड ब्यूरो — देश के दक्षिणी राज्य केरल में खेती की दुनिया से एक बहुत ही दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के किसानों ने अब दशकों पुरानी पारंपरिक रबर की खेती से तौबा करना शुरू कर दिया है। किसान अपने बड़े-बड़े रबर के बागों के पेड़ों को काटकर साफ कर रहे हैं। रबर की गिरती कीमतों और मेहनत के मुकाबले कम रिटर्न से परेशान किसान अब एक नए रास्ते पर चल पड़े हैं। इस नए बदलाव को स्थानीय भाषा में पाइप में उगने वाला सोना कहा जा रहा है, जो किसानों के लिए कमाई का एक नया जरिया बन गया है।
केरल के अलग-अलग जिलों में किसान अब जमीन पर पारंपरिक फसलों की जगह ऐसी फसलों को तरजीह दे रहे हैं जिन्हें नियंत्रित माहौल या खास तकनीकी सेटअप में उगाया जा सकता है। इसमें वैनिला और अन्य नकदी फसलें शामिल हैं जिन्हें पाइप या वर्टिकल सिस्टम के जरिए तैयार किया जा रहा है। इस अनोखी खेती से किसानों को कुछ ही महीनों में लाखों रुपये का मुनाफा मिल रहा है। बाजार में इस खास फसल की मांग बहुत ज्यादा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे किसानों की आर्थिक हालत तेजी से सुधर रही है।
रबर के बागों को अलविदा कह रहे हैं किसान
कोट्टायम और इडुक्की जैसे इलाकों में रहने वाले किसानों का कहना है कि रबर की खेती में अब पहले जैसी बात नहीं रही। मौसम की मार, मजदूरी का बढ़ता खर्च और वैश्विक बाजार में रबर के दाम कम होने से किसानों की लागत भी मुश्किल से निकल पा रही थी। ऐसे में किसानों ने साहसिक कदम उठाते हुए अपने पुराने रबर के पेड़ों को उखाड़ फेंकना शुरू कर दिया है। इन खाली हुई जमीनों पर अब आधुनिक तरीकों से महंगी फसलें उगाई जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केरल के ग्रामीण अर्थशास्त्र को पूरी तरह से बदलकर रख देगा।
दूसरी तरफ, अगर हम सर्राफा बाजार और कीमती धातुओं की बात करें तो सोने के दाम भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतें रोजाना ऊपर-नीचे हो रही हैं। हाल ही में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मामूली मजबूती ने घरेलू बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों को थोड़ा थामने का काम जरूर किया है, लेकिन आम आदमी की पहुंच से सोना अभी भी दूर ही बना हुआ है। बड़े ब्रांड्स के शोरूम में चौबीस कैरेट और बाईस कैरेट सोने के जेवरों के दाम लगातार ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।
रुपये की मजबूती से सोने की कीमतों में आई राहत
व्यापारिक और आर्थिक मोर्चे पर पिछले कुछ दिनों में मुद्रा बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में जब रुपया मजबूत होता है, तो उसका सीधा असर आयात होने वाली चीजों पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेश से मंगाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर घरेलू दरों पर साफ दिखाई देता है। दोपहर के कारोबार के दौरान जब रुपये ने थोड़ी ताकत दिखाई, तो निवेशकों को सोने की बढ़ती कीमतों से मामूली राहत जरूर मिली, वरना पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेजी का रुख बना हुआ था।
केरल के गांवों में जहां एक तरफ किसान अपनी जमीन पर नए प्रयोग करके मालामाल हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम लोग सोने के बढ़ते दामों से परेशान नजर आ रहे हैं। किसानों का यह नया कदम यानी पाइप और आधुनिक तकनीकी खेती से सोना जैसी कमाई करना, ग्रामीण युवाओं को भी खेती की तरफ वापस खींच रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं कि पारंपरिक खेती छोड़कर इस तरह के आधुनिक और नकदी फसलों के विकल्प अपनाना ही भविष्य का रास्ता है।
कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग और भविष्य की उम्मीदें
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि केरल का किसान अब सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह रिस्क लेने के लिए तैयार है और ग्लोबल मार्केट की मांग के हिसाब से अपनी फसलें बदल रहा है। रबर की जगह इस नए 'सोने' की खेती ने साबित कर दिया है कि अगर सही समय पर सही फैसला लिया जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि लाखों की कमाई का जरिया बन सकती है। आने वाले दिनों में राज्य के दूसरे हिस्सों के किसान भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।






