त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही देश भर में रसोई गैस यानी एलपीजी को लेकर हलचल तेज हो गई है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन के दौरान यह बात सामने आई है कि एक तरफ जहां उपभोक्ता बढ़े हुए दामों और त्योहारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और तकनीकी पेच ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक, एलपीजी की कीमतों में फेरबदल और नए नियमों ने बाजार में एक अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
बढ़े हुए दाम और त्योहारों का गणित
जैसे-जैसे देश में फेस्टिव सीजन नजदीक आ रहा है, कमर्शियल और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के नए रेट जारी कर दिए गए हैं। राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक, कीमतों में हुए बदलाव ने आम परिवारों के बजट को प्रभावित किया है। हालांकि सरकार कुछ वर्गों को राहत देने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) और मुफ्त कनेक्शन जैसी योजनाओं पर जोर दे रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। छोटे दुकानदारों और गृहणियों का कहना है कि हर महीने कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से उनका मासिक बजट गड़बड़ा जाता है।
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ई-केवाईसी की अनिवार्यता और मैदानी राज्यों की हकीकत
रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए इस समय सबसे बड़ी सिरदर्दी ई-केवाईसी प्रक्रिया बन गई है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जैसे जिलों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, अभी भी लगभग 30% उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाई है। इसके चलते घरेलू कनेक्शन धारकों को भविष्य में सब्सिडी या सुगम आपूर्ति को लेकर असमंजस का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे उपभोक्ताओं का कहना है कि तकनीकी जटिलताओं और जागरूकता की कमी के कारण वे समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें सिलेंडर मिलने में रुकावट का डर सता रहा है।
काले बाजार और अवैध भंडारण पर नकेल
एक तरफ आम उपभोक्ता नियमों को पूरा करने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ मुनाफाखोरों और अवैध कारोबारियों की सक्रियता भी कम नहीं हुई है। हाल ही में मुगलसराय और अन्य क्षेत्रों में हुई छापेमारी इसका प्रमाण है। पूर्ति विभाग द्वारा एक मकान से 21 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर (जिनमें 18 भारत गैस और 3 इंडेन के शामिल हैं) बरामद किए जाने के बाद यह सवाल खड़े हो गए हैं कि त्योहारी मांग के समय गैस की कालाबाजारी किस हद तक सक्रिय है। इस तरह के अवैध भंडारण से न केवल घरेलू आपूर्ति बाधित होती है, बल्कि रिहायशी इलाकों में बड़ा हादसों का खतरा भी मंडराता रहता है।
नई बुकिंग व्यवस्था और 50 लाख नए कनेक्शन
इन तमाम चुनौतियों के बीच सरकार एलपीजी बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने और देश भर में 50 लाख नए कनेक्शन देने की नई योजना लेकर आई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के दूरदराज इलाकों तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच हो और उपभोक्ताओं को लंबी कतारों या तकनीकी झंझटों से मुक्ति मिले। बहरहाल, जब तक जमीनी स्तर पर ई-केवाईसी की बाधाएं दूर नहीं होतीं और अवैध भंडारण पर पूरी तरह लगाम नहीं लगती, तब तक आम आदमी को गैस सिलेंडर के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पाएगी।








