नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद निराशाजनक रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स एक ही झटके में एक हजार अंक लुढ़क गया है। इस भारी गिरावट के बाद सेंसेक्स 71,600 के स्तर पर बंद हुआ है। बाजार के जानकारों के अनुसार यह पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी गिरावट में से एक है। इस उथल-पुथल से छोटे निवेशकों की गाढ़ी कमाई पर बड़ा असर पड़ा है।
बाजार में बिकवाली का यह दौर अचानक नहीं आया है। पिछले नौ हफ्तों से लगातार शेयर बाजार लगातार लाल निशान में ही बंद हो रहा है। लगातार नौ हफ्तों तक बाजार का गिरना यह बताता है कि निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। देश और दुनिया के आर्थिक हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग शेयर बेचने में ही भलाई समझ रहे हैं। हालात को संभालने के लिए बड़े निवेशक भी आगे नहीं आ पा रहे हैं क्योंकि बाजार में हर तरफ डर का माहौल बना हुआ है।
कच्चा तेल महंगा होने से बढ़ी मुश्किलें
इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लगातार महंगा होता जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और कंपनियों का खर्च भी ऊपर चला जाता है। जब कंपनियों का खर्च बढ़ता है तो उनका मुनाफा कम हो जाता है, जिसका सीधा असर उनके शेयरों के दामों पर पड़ता है।
कच्चे तेल के अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से भी बाजार की कमर टूट गई है। विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजारों से लगातार अपने पैसे वापस ले रहे हैं। जब देश से विदेशी पैसा बाहर जाता है तो रुपए की कीमत भी कमजोर होती है। इन सभी बातों का मिला-जुला असर आज सेंसेक्स की इस बड़ी गिरावट के रूप में सामने आया है। आम लोगों की जेब पर भी इसका परोक्ष रूप से भारी असर पड़ रहा है।
मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
आज के कारोबार में सबसे बुरी हालत मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों की रही है। इन दोनों सेक्टरों में निवेशकों ने आँख मूँदकर बिकवाली की है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के शेयरों के गिरने की बड़ी वजह यह है कि कच्चे माल के दाम बढ़ गए हैं। इसके अलावा टाटा स्टील और हिंडाल्को जैसी मेटल कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे क्योंकि वैश्विक स्तर पर मेटल की मांग कम हो रही है।
बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी आज कोई खास राहत नहीं मिली है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ देखा गया। बाजार में जब इस तरह की चौतरफा बिकवाली होती है तो अच्छे शेयरों के दाम भी नीचे आ जाते हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या है रास्ता
इस भारी उतार-चढ़ाव के बीच वित्तीय सलाहकारों ने छोटे निवेशकों को संयम रखने की सलाह दी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घबराकर अपने शेयर औने-पौने दामों पर न बेचें। जो लोग लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अच्छे शेयरों को सही कीमत पर खरीदने का मौका भी हो सकता है। हालांकि, नया निवेश करने से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता को जरूर जांच लें।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले हफ्तों में भी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। मध्य पूर्व के देशों में चल रहे तनाव और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसलों पर सबकी नजर टिकी हुई है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं, तब तक भारतीय शेयर बाजार को राहत मिलने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है।







