नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के करोड़ों यूपीआई यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बाजार में चर्चा थी कि पंद्रह अक्टूबर से दो हजार रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज यानी फीस लग सकती है। लेकिन अब सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि इस नए चार्ज का नियम अगले साल तक के लिए टाला जा सकता है। इसका मतलब साफ है कि इस फेस्टिव सीजन में आपको अपने रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट पर कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा और लेनदेन पूरी तरह से फ्री बना रहेगा।
इस पूरे मामले की जमीनी पड़ताल करने पर पता चला कि फिनटेक कंपनियां और पेमेंट ऑपरेटर्स लगातार सरकार के संपर्क में थे। त्योहारी सीजन के दौरान देश में खरीदारी का बाजार सबसे बड़ा होता है। लोग कपड़े, मिठाई, गिफ्ट और गहने खरीदने के लिए धड़ल्ले से फोनपे, गूगल पे और पेटीएम जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। अगर ऐसे समय में यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगा दिया जाता, तो बाजार में डिजिटल लेनदेन की रफ्तार धीमी हो सकती थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को फिलहाल आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि आम जनता पर त्योहारी खर्च का बोझ न बढ़े।
त्योहारी सीजन में डिजिटल खरीदारी पर नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त बोझ
बाजार के जानकारों का मानना है कि भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति की सबसे बड़ी ताकत इसकी मुफ्त सुविधा रही है। जब छोटे से छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह लोग बिना किसी झिझक के स्कैन करके पैसे चुकाते हैं, तो अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलती है। अगर दो हजार से ज्यादा के भुगतान पर शून्य दशमलव चार प्रतिशत का चार्ज लगाने वाला नियम लागू हो जाता, तो व्यापारी वर्ग और ग्राहक दोनों इसके विरोध में आ सकते थे। त्योहारी माहौल को देखते हुए सरकार और वित्तीय नियामक कंपनियां नहीं चाहती हैं कि खरीदारी के इस बड़े मौके पर किसी भी तरह की रुकावट पैदा हो।
देश के कई बड़े बैंकों और मर्चेंट एसोसिएशन ने भी इस संभावित नियम पर अपनी चिंता जाहिर की थी। उनका कहना था कि यूपीआई को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में अभी कुछ और वक्त लगना चाहिए। जब तक देश का हर नागरिक डिजिटल लेनदेन के फायदों से पूरी तरह नहीं जुड़ जाता, तब तक किसी भी तरह का नया शुल्क लागू करना जल्दबाजी होगी। फेस्टिव सीजन में लोग दिल खोलकर खरीदारी करते हैं और छोटे व्यापारियों का सालभर का कारोबार इसी समय सबसे ज्यादा चमकता है। ऐसे में पेमेंट फ्री रहने से मार्केट में रौनक बनी रहेगी और कैशलेस अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता रहेगा।
अगले साल तक टल सकता है चार्ज लगाने का पूरा प्रस्ताव
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक और अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन अंदरखाने की खबरों से यह तय माना जा रहा है कि पंद्रह अक्टूबर से लागू होने वाली समय सीमा को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले महीनों में भी आप बिना किसी चिंता के अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और दुकानदारों को यूपीआई के जरिए पैसे भेज सकेंगे। बैंक खाते से सीधे पैसे ट्रांसफर करने की यह सुविधा पूरी तरह सुरक्षित और मुफ्त बनी रहेगी।
आम आदमी के लिए यह खबर किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है क्योंकि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच डिजिटल पेमेंट पर लगने वाला कोई भी नया चार्ज उनकी जेब पर भारी पड़ सकता था। अब लोग बिना किसी अतिरिक्त टेंशन के अपनी दीवाली की शॉपिंग की योजना बना सकते हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस पर कोई आधिकारिक सरकारी बयान सामने आएगा, हम सबसे पहले आप तक उसकी सटीक जानकारी पहुंचाएंगे। तब तक आप बेफिक्र होकर अपने फोन से डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।
दुकानदारों और ग्राहकों के लिए क्या हैं इसके मायने
इस फैसले के टलने से देश के छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों ने भी राहत की सांस ली है। जो व्यापारी क्यूआर कोड के जरिए ग्राहकों से पेमेंट लेते हैं, उन्हें डर था कि चार्ज लगने से ग्राहक दोबारा कैश की तरफ लौट सकते हैं। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ है कि आने वाले समय तक कोई नया वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। ग्राहक अपनी पसंद की हर छोटी-बड़ी चीज बिना किसी झिझक के खरीद पा रहे हैं और दुकानदार भी खुशी-खुशी डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं।





