उत्तर प्रदेश का फतेहपुर जिला इस वक्त दो अलग-अलग वजहों से काफी चर्चा में बना हुआ है। एक तरफ जहां कोर्ट ने एक पुराने और गंभीर मामले में सख्त फैसला सुनाया है। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम अवैध क्लीनिक चलाने वालों के खिलाफ मैदान में उतर चुकी है। कानून व्यवस्था को लेकर लोग इन फैसलों की जमकर चर्चा कर रहे हैं।
पहला मामला जमीन के विवाद से जुड़ा हुआ है जो खून-खराबे और मौत तक पहुंच गया था। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद दो सगे भाइयों को दोषी करार दिया। मां के कहने पर इन दोनों भाइयों ने एक युवक को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। अदालत ने इन दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और इन पर एक लाख चार हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जमीन का पुराना विवाद बना खूनी संघर्ष
अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साफ हो गया कि मामूली जमीन के टुकड़े के लिए इंसानी जान ले ली गई। हत्या की इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहा था। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को कुछ राहत जरूर मिली है।
एक अन्य मामले में फतेहपुर में हत्या के प्रयास के चार दोषियों को भी अदालत ने तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। लगातार आ रहे इन फैसलों से साफ है कि अदालतें गंभीर मामलों में तेजी से सुनवाई कर रही हैं। अपराधियों के मन में कानून का डर बिठाने के लिए इस तरह के फैसले बहुत जरूरी माने जा रहे हैं।
फर्जी डॉक्टरों और झोलाछापों पर प्रशासन का शिकंजा
न्यायिक फैसलों के साथ-साथ फतेहपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर भी बड़ा एक्शन हुआ है। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के कारण कुछ लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रशासन की टीमों ने कई इलाकों में अचानक जाकर क्लीनिकों की जांच की।
जांच के दौरान ज्यादातर क्लीनिकों में भारी कमियां पाई गईं। कई जगहों पर बिना किसी वैध डिग्री और कागजात के मरीजों का इलाज किया जा रहा था। प्रशासन ने ऐसे सभी झोलाछाप संचालकों को नोटिस जारी किया है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे चौबीस घंटे के भीतर अपने सभी दस्तावेज पेश करें वरना कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे के कदम
द फ्रीलान्स की टीम ने जब फतेहपुर के स्थानीय लोगों से बात की तो उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया। लोगों का कहना है कि गांवों और कस्बा इलाकों में बिना डिग्री वाले ये फर्जी डॉक्टर गरीब लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रशासन की इस सख्ती से अब इन अवैध क्लीनिकों पर लगाम लगने की उम्मीद जग गई है।
एक तरफ जहां अदालतों ने हत्या के आरोपियों को जेल भेजकर कानून का राज कायम किया है। वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में जुटा है। आम जनता को उम्मीद है कि इन दोनों ही मोर्चों पर उठाए गए कदमों से जिले में अपराध और लापरवाही दोनों पर रोक लगेगी।






