नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त हलचल मची हुई है। कभी बाजार धड़ाम से नीचे गिर जाता है तो कभी अचानक संभल जाता है। निवेशकों की सांसें अटकी हुई हैं क्योंकि हर दिन के कारोबार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आम लोग अपने गाढ़े पसीने की कमाई को शेयरों में लगाकर मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में बाजार की यह चाल छोटे निवेशकों को डरा भी रही है और चौंका भी रही है।
टाटा समूह का एक बड़ा शेयर इन दिनों भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। इस शेयर में आई कमजोरी की वजह से निवेशकों को लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हो चुका है। स्थिति यह है कि इस शेयर की कीमत अपने सबसे ऊंचे स्तर यानी ऑल-टाइम हाई से पचास प्रतिशत से भी ज्यादा नीचे लुढ़क चुकी है। जो निवेशक इस शेयर को भविष्य की मजबूत पूंजी मानकर बैठे थे, वे अब भारी नुकसान में नजर आ रहे हैं। इस बड़ी गिरावट ने बाजार के बड़े खिलाड़ियों को भी चिंता में डाल दिया है।
टाटा के शेयर में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और कंपनी के कमजोर तिमाही नतीजों ने इस शेयर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की है जिससे इस शेयर का भाव लगातार नीचे गिरता चला गया। आम निवेशकों के मन में अब यह सवाल बार-बार आ रहा है कि क्या यह शेयर फिर से संभलेगा। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में इस तरह का करेक्शन कई बार पुरानी और बड़ी कंपनियों में भी देखने को मिल जाता है।
दूसरी ओर, टाइटन के शेयर को लेकर भी बाजार में काफी चर्चा बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2027 के लिए आए अपडेट के मुताबिक, टाइटन के शेयरों में हालिया गिरावट के बावजूद विकास की लंबी संभावनाएं बरकरार हैं। कंपनी का कारोबार मजबूत बना हुआ है और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है। जिन लोगों ने टाइटन में पैसा लगाया है, वे इसे लंबी अवधि का निवेश मानकर अपने पास होल्ड रखे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि बाजार की मौजूदा गिरावट के बीच ऐसी मजबूत कंपनियों के शेयर भविष्य में अच्छा मुनाफा दे सकते हैं।
आरबीआई के फैसलों और रेपो रेट का असर
रिजर्व बैंक यानी आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद शेयर बाजार की चाल पर सीधा असर पड़ा है। एक तरफ जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इससे कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होता है और शेयर बाजारों में बिकवाली शुरू हो जाती है। हालांकि, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीच-बीच में अच्छी रिकवरी भी दिखाई है। बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधि और घरेलू निवेशकों का भरोसा इस संभलने की मुख्य वजह बना है।
मुख्य बाजारों में सुस्ती के बीच छोटे शेयरों यानी स्मालकैप शेयरों की चांदी कट रही है। हाल ही में बाजार में हाहाकार के माहौल के बीच कुछ खास स्मालकैप शेयरों में खरीदारी की ऐसी लूट मची कि भाव पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा उछल गए। इसके अलावा, कुछ नए आईपीओ ने भी निवेशकों को शुरुआती दौर में ही बीस प्रतिशत तक का बढ़िया फायदा दिया है। इन नए शेयरों का भाव उनके आईपीओ प्राइस से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है।
नया निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल कहती है कि शेयर बाजार में बिना सोचे-समझे पैसा लगाना सबसे बड़ा जोखिम है। किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके बुनियादी यानी फंडामेंटल मजबूत होने की जांच जरूर कर लेनी चाहिए। केवल दूसरों की देखा-देखी पैसे लगाने से हमेशा बचना चाहिए क्योंकि बाजार कभी भी किसी की गारंटी नहीं देता है। अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखना और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना ही समझदारी भरा कदम साबित होता है।



