चेन्नई/कोयंबटूर: 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम जब तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में उतरी, तो रसोई गैस यानी 'சிலிண்டர்' से जुड़ी एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो नीति निर्माताओं और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के दावों की पोल खोलती है। पिछले कुछ घंटों से गूगल ट्रेंड्स में शीर्ष पर चल रहे इस विषय की तह तक जाने पर पता चलता है कि तमिलनाडु इस समय एक साथ तीन मोर्चों—घरेलू सप्लाई में भारी देरी, कमर्शियल गैस के बढ़ते दाम और सुरक्षा एवं हादसों के खतरे—से जूझ रहा है।
चेन्नई में घरेलू एलपीजी की किल्लत: 15 दिन का इंतजार
राजधानी चेन्नई के शोलिंगनल्लूर, कोरात्तूर और तोंडियारपेट जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में घरेलू एलपीजी रिफिल की डिलीवरी में भारी विलंब देखा जा रहा है। स्थिति यह है कि सिंगल-सिलेंडर वाले परिवारों को एक सिलेंडर के लिए 15 दिन से अधिक का इंतजार करना पड़ रहा है। 'द फ्रीलान्स' के संवाददाताओं ने जब स्थानीय निवासियों से बातचीत की, तो उनका गुस्सा साफ झलकता था। महिलाओं का कहना है कि गैस बुकिंग के बाद समय पर रिफिल न मिलने से उनकी रसोई का पूरा बजट और कामकाज चरमरा गया है। निवासियों ने सरकार से बुकिंग गैप को कम करने या अतिरिक्त सिलेंडर रखने की अनुमति देने की मांग की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।
संबंधित खबरें
कमर्शियल सिलेंडर के दाम आसमान पर, रेस्तरां और टी-शॉप संचालकों पर आफत
घरेलू मोर्चों पर किल्लत के बीच, कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए भी बुरी खबर है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है। चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह दरें ₹3,283 प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई हैं। इससे पहले भी लगातार दरों में फेरबदल देखा गया था। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे छोटे होटल, रेस्तरां, ढाबे और चाय की दुकानों के मालिकों का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतें उनके मुनाफे को पूरी तरह से निगल रही हैं। कई छोटे व्यापारियों के सामने अपना व्यवसाय बंद करने का संकट खड़ा हो गया है।
कोयंबटूर टाउन हॉल आगजनी और सिलेंडर ब्लास्ट: डराते आंकड़े
गैस सिलेंडरों से जुड़ी प्रशासनिक और आर्थिक समस्याओं के बीच सुरक्षा का पहलू भी बेहद भयावह रूप ले चुका है। हाल ही में कोयंबटूर के व्यस्त टाउन हॉल बाजार इलाके में भीषण आग लगने की घटना सामने आई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न हिस्सों से सिलेंडर फटने (Cylinder Blast) की खबरें भी आ रही हैं, जिसमें हाल ही में बचाव कार्य के दौरान कुछ अग्निशामक (Firefighters) कर्मियों के घायल होने की खबर ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इन हादसों ने यह साबित कर दिया है कि घरेलू और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सिलेंडरों के रखरखाव में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
जनता की मांग और प्रशासनिक मोर्चे पर खामोशी
- सप्लाई चेन में सुधार: चेन्नई के उपनगरीय इलाकों में रुकी हुई डिलीवरी को तत्काल सामान्य बनाने की मांग जोर पकड़ रही है।
- मूल्य नियंत्रण: कमर्शियल सिलेंडरों के बढ़ते दामों पर लगाम कसने के लिए होटल एसोसिएशन सरकार से सब्सिडी या राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं।
- सुरक्षा ऑडिट: कोयंबटूर और अन्य शहरों में हुए हादसों के बाद अवैध रीफिलिंग यूनिट्स और सुरक्षा मानकों की जमीनी जांच की सख्त आवश्यकता है।
निष्कर्षतः, तमिलनाडु में 'सिलेंडर' का यह मुद्दा अब महज एक रसोई का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आम आदमी की आजीविका, व्यापार और जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा एक जटिल संकट बन चुका है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और संबंधित विभागों से जवाब तलब करेगा।








