डिजिटल युग में तकनीक जितनी आसान हुई है, साइबर अपराधियों के लिए जालसाजी के तरीके उतने ही शातिर होते जा रहे हैं। हाल ही में साइबर फ्रॉड का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। अपराधियों ने बहुत ही शातिर तरीके से एक कंपनी के मालिक की डिजिटल पहचान चुराई और उनके ही अकाउंटेंट को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया। हालांकि, थोड़ी सी सतर्कता और एक फोन कॉल ने इस बड़े फर्जीड़े का पर्दाफाश कर दिया।
वॉट्सऐप पर बॉस की फोटो देख अकाउंटेंट को हुआ यकीन
यह मामला देश के एक बड़े हिस्से में स्थित निजी फाइनेंस कंपनी से जुड़ा है, जहां एक 51 वर्षीय अनुभवी अकाउंटेंट काम करता है। कंपनी में पैसों के लेन-देन और वित्तीय कामकाज की जिम्मेदारी इसी अकाउंटेंट के पास थी। गत कुछ दिनों पहले अचानक उसके मोबाइल फोन पर एक वॉट्सऐप मैसेज आया। भेजने वाले की प्रोफाइल पर कंपनी के बॉस की फोटो लगी हुई थी और नाम भी बॉस का ही सेव था।
चूंकि नंबर पर मालिक की तस्वीर और नाम देखकर अकाउंटेंट को पूरी तरह विश्वास हो गया कि निर्देश खुद 'बॉस' की तरफ से ही आ रहे हैं, उसने बिना किसी शक के बताए गए बैंक खाते में एक झटके में 95.80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। अकाउंटेंट को जरा भी अंदेशा नहीं हुआ कि वह किसी शातिर साइबर ठग के बिछाए जाल में फंस चुका है।
अगली मांग ने खोल दी पूरे खेल की पोल
ठगों का लालच यहीं नहीं रुका। पहली बार में बड़ी रकम आसानी से मिल जाने के बाद, अगले ही दिन उसी फर्जी नंबर से फिर से मैसेज आया। इस बार साइबर ठगों ने एक अन्य बैंक खाता नंबर भेजकर 1.26 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। रकम पहली बार से काफी बड़ी थी, जिसके चलते अकाउंटेंट के मन में थोड़ा संदेह उत्पन्न हुआ।
शक होने पर अकाउंटेंट ने सीधे ऑफिस में मौजूद अपने असली बॉस से आमने-सामने बात की। जब उसने पूछा कि क्या उन्होंने पैसे भेजने के लिए कोई नया मैसेज भेजा है, तो बॉस यह सुनकर चौंक गए और साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा था। इसके बाद सच्चाई सामने आई कि जिस नंबर से निर्देश आ रहे थे, वह बॉस का असली नंबर था ही नहीं, बल्कि ठगों ने बॉस के नाम और फोटो का क्लोन बनाकर पूरी साजिश रची थी।
पुलिस जांच में जुटी, साइबर सेल अलर्ट
घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम सेल में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने या तो कंपनी के सिस्टम को हैक किया था या फिर बेहद शातिराना तरीके से बॉस की सोशल मीडिया और डिजिटल पहचान की नकल की थी। पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पैसों के ट्रेल की जांच शुरू कर दी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से बचने के लिए वित्तीय लेनदेन से जुड़े किसी भी निर्देश को केवल चैट के भरोसे पूरा नहीं करना चाहिए, बल्कि फोन कॉल या आमने-सामने बात करके उसकी पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो एवं खबरों के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह घटना साइबर सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। साभार: संबंधित रिपोर्ट्स / पुलिस इनपुट।
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