नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में अपनी बोल्ड कहानियों के लिए चर्चा में रहने वाली वेब सीरीज 'एक्सएक्सएक्स: अनसेंसर्ड 2' के मामले में निर्माता एकता कपूर को बड़ी राहत मिली है। हैदराबाद पुलिस ने इस सीरीज की सामग्री पर आपत्ति जताते हुए दर्ज कराई गई शिकायत को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। पिछले कुछ समय से इस सीरीज के कुछ दृश्यों और संवादों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे थे।
इस मामले में विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। राजपूत करणी सेना समेत कई अन्य संगठनों ने भी इस सीरीज के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और पुलिस थानों में शिकायत पत्र सौंपे थे। इन संगठनों का आरोप था कि सीरीज में दिखाए गए दृश्य समाज के एक वर्ग की भावनाओं को ठेس पहुंचाते हैं। हालांकि, पुलिस और कानूनी जानकारों ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस शिकायत पर आगे कोई कानूनी कार्रवाई न करने का फैसला लिया।
हैदराबाद पुलिस की जांच और कानूनी फैसला
हैदराबाद पुलिस के अधिकारियों ने इस मामले की गहन प्राथमिक जांच की। जांच के दौरान यह देखा गया कि क्या इस सीरीज की सामग्री किसी मौजूदा कानून का उल्लंघन करती है या नहीं। पुलिस ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद पाया कि इस शिकायत में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बनता है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में दर्ज शिकायत को खारिज करने का निर्णय लिया, जिससे निर्माताओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली इन सीरीज को लेकर पिछले कुछ सालों से नियमों और सेंसरशिप पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। डिजिटल सामग्री की बढ़ती पहुंच के बीच यह सवाल बार-बार उठता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमाएं क्या होनी चाहिए। इस तरह के मामलों में पुलिस और अदालतों का रुख अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि क्या सामग्री से किसी कानून का सीधा उल्लंघन हुआ है या नहीं।
विभिन्न संगठनों का विरोध और करणी सेना की आपत्ति
वेब सीरीज के रिलीज होने के बाद से ही देश के कई शहरों में इसका विरोध शुरू हो गया था। करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपे थे और सीरीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि इस तरह की वेब सीरीज भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के कारण निर्माताओं की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं और उन्हें कई कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
दूसरी ओर, डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की पसंद के अनुसार सामग्री बनाई जाती है। कलाकारों और निर्देशकों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इस बहस के बीच हैदराबाद पुलिस का यह फैसला इस बात का संकेत देता है कि कानूनी दायरे में रहकर ही ऐसे मामलों का समाधान निकाला जा रहा है।
ओटीटी सामग्री और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के विस्तार के साथ ही सामग्री के नियमन को लेकर सरकार और उद्योग जगत के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आचार संहिता बनाई है ताकि किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाई जा सके। इसके बावजूद, कई बार व्यक्तिगत शिकायतें थानों और अदालतों तक पहुंच जाती हैं, जहाँ न्यायपालिका और पुलिस कानून के मुताबिक फैसला करती हैं।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले समय में डिजिटल कंटेंट मेकर्स और विरोध करने वाले संगठनों के बीच यह वैचारिक संघर्ष जारी रहेगा। जब तक ओटीटी नियमों को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट और अंतिम दिशा-निर्देश नहीं आते, तब तक इस तरह के विवाद अदालतों और पुलिस की फाइलों में आते रहेंगे। फिलहाल एकता कपूर और उनकी टीम के लिए यह फैसला एक बड़ी कानूनी राहत लेकर आया है।





