परिवार के भीतर पनप रही अविश्वास की दीवार और खूनी संघर्ष
आधुनिक समय में भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच रिश्तों की डोर लगातार कमजोर होती जा रही है। घर-परिवार के भीतर आपसी विश्वास की कमी और छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े कई बार इतने भयानक रूप ले लेते हैं कि वे सीधे तौर पर अपराध की दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं। पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से जो आपराधिक मामले सामने आए हैं, उन्होंने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते में शक और नशे की लत इस कदर हावी हो चुकी है कि मामूली कहासुनी भी जानलेवा साबित हो रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पारिवारिक विवादों के चलते होने वाले अपराधों में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है, जो समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जांच एजेंसियों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू कलह को समय रहते सुलझाने के प्रयास न किए जाने के कारण ऐसी त्रासदियां जन्म लेती हैं। जब संवाद का रास्ता बंद हो जाता है और अहंकार या नशे की आदत सिर चढ़कर बोलने लगती है, तब इंसान अपने ही परिवार के सदस्यों का दुश्मन बन बैठता है। राजधानी लखनऊ से लेकर जम्मू तक हाल ही में सामने आए संगीन मामलों ने यह साबित कर दिया है कि कैसे अनियंत्रित क्रोध और अविश्वास किसी भी हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ सकता है।
शराब की लत और शक ने ली महिला की जान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में हुई एक खौफनाक वारदात ने सभी को हैरान कर दिया है। यहां एक पति ने अपनी ही पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस की शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से यह साफ हुआ है कि आरोपी पति शराब का आदी था और आए दिन घर में कलह मचाता था। उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर भी बेवजह का शक था। इसी शक और नशे के नशे में चूर होकर उसने रात के वक्त अपनी पत्नी की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर डाली। घटना के वक्त घर में मासूम बच्चे भी मौजूद थे, जिन्होंने इस पूरी क्रूरता को अपनी आंखों से देखा।
मृतका के बेटे ने हिम्मत जुटाकर थाने में अपने पिता के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। बेटे की तहरीर के आधार पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। डीसीपी दक्षिणी के निर्देश पर गठित की गई विशेष पुलिस टीमों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय मुखबिरों की मदद से जाल बिछाया और आरोपी पति को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और पुलिस अब इस पूरे मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई को अंजाम दे रही है।
रिश्तों के कत्ल के मामलों में पुलिस की सख्त और त्वरित कार्रवाई
चाहे मामला जम्मू के नानक नगर का हो जहां एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां की गला रेतकर हत्या कर दी थी, या फिर लखनऊ और मेरठ के अन्य क्रूर पारिवारिक हत्याकांड हों, कानून और पुलिस महकमे ने अपराधियों के खिलाफ हमेशा सख्त रुख अपनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घरेलू हिंसा और अंधविश्वास के मामलों में जरा भी नरमी नहीं बरती जा रही है। फॉरेंसिक टीमों को मौके पर भेजकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाते हैं ताकि अदालत में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। मेरठ की एक अदालत द्वारा हाल ही में एक अन्य मामले में दिए गए कड़े फैसलों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि कानून की नजर से अपराधी बच नहीं सकते।
"परिवार समाज की सबसे छोटी और मजबूत इकाई है। जब पारिवारिक ताना-बाना बिखरता है और असामाजिक या हिंसक प्रवृतियां घर करती हैं, तो कानून को पूरी सख्ती से अपनी भूमिका निभानी पड़ती है। हमारी टीमें हर मामले में साक्ष्य आधारित कार्रवाई कर रही हैं ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।"— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
समाज में बढ़ती आक्रामकता और काउंसलिंग की सख्त जरूरत
इन तमाम आपराधिक घटनाओं का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आती है कि आज के दौर में मानसिक तनाव और सहनशक्ति की भारी कमी हो गई है। छोटी-छोटी घरेलू उलझनों को बातचीत से सुलझाने के बजाय लोग गुस्से और हिंसा का सहारा ले रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि समय रहते पारिवारिक कलह के मामलों में पेशेवर काउंसलिंग और सामाजिक स्तर पर समझाइश की जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग और परिजनों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे घरों पर नजर रखें जहां कलह आम बात हो चुकी है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को होने से पहले ही रोका जा सके।












