नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की जानी-मानी दवा कंपनी बायोकॉन इन दिनों एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही है। एक तरफ जहां कंपनी पर टैक्स और विज्ञापनों से जुड़े मामलों का शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके नए उत्पादों को लेकर बड़े बाजार में बड़ी सफलता भी मिल रही है। शेयर बाजार से लेकर आम जनता तक हर कोई इस समय बायोकॉन की हर एक हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है। कंपनी के कारोबार में पिछले कुछ दिनों से काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और नए सौदों से निवेशकों की उम्मीदें भी बंध गई हैं।
ताजा घटनाक्रम के अनुसार, टैक्स अधिकारियों ने बायोकॉन पर शिकंजा कसते हुए 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस थमाया है। अधिकारियों का मानना है कि कंपनी ने टैक्स भुगतान और इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में कुछ गड़बड़ी की है। इसके अलावा, कंपनी के कुछ उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि ये विज्ञापन ग्राहकों को गुमराह करने वाले थे। इस मामले में खाद्य और औषधि प्रशासन यानी एफडीए आने वाले दिनों में आगे की सुनवाई करेगा और कंपनी को अपना पक्ष रखना होगा।
जीएसटी नोटिस और विज्ञापनों पर एफडीए की सख्ती
टैक्स और विज्ञापनों के इन मामलों ने शेयर बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है। निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन कानूनी पचड़ों से कंपनी की साख पर कोई असर पड़ेगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बड़ी फार्मा कंपनियों के लिए इस तरह के नोटिस और कानूनी नोटिस आम बात होते हैं और कानूनी टीम इनका जवाब देने में सक्षम होती है। फिर भी, तीन करोड़ से ज्यादा का यह जीएसटी नोटिस कंपनी के खातों की नए सिरे से जांच की मांग जरूर पैदा करता है आम निवेशकों के बीच।
दूसरी तरफ, बायोकॉन के लिए राहत और उम्मीद की बड़ी किरण उसकी कैंसर की दवा 'पेब्रिल्जो' से जुड़ी हुई है। कंपनी की इस दवा के साल 2028 तक बाजार में पूरी तरह उतरने का रास्ता अब साफ हो चुका है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस दवा को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब यह दवा तय समय पर बाजार में आएगी, तो कंपनी की कुल कमाई और मुनाफे में एक बहुत बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
कैंसर दवा पेब्रिल्जो और सैंडोज संग बड़ी साझेदारी
सिर्फ 'पेब्रिल्जो' ही नहीं, बल्कि बायोकॉन बायोलॉजिक्स ने हाल ही में सैंडोज ऑस्ट्रेलिया के साथ भी एक बहुत बड़ी साझेदारी की है। इस डील के तहत कंपनी ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में कैंसर की अन्य जरूरी दवाएं बेचेगी। इस अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से कंपनी का दायरा विदेशों में और ज्यादा मजबूत होगा। शेयर बाजार में इस ब्लॉक डील और अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाद से ही शेयरों में हरियाली यानी तेजी का रुख देखा जा रहा है। निवेशकों को भरोसा है कि विदेशी बाजारों में पैर पसारने से कंपनी को मोटा मुनाफा होगा।
स्थानीय स्तर पर और शेयर बाजार के जानकारों के बीच इस बात की चर्चा है कि बायोकॉन एक साथ चुनौतियों और अवसरों के बीच संतुलन बना रही है। एक तरफ जहां जीएसटी और एफडीए के नोटिस जैसी कानूनी बाधाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय सौदे और नई दवाएं कंपनी की ताकत बढ़ा रही हैं। आम निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और कंपनी के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी टैक्स के इन मामलों को कैसे सुलझाती है।
बाजार में तेजी के ट्रिगर्स और निवेशकों के लिए सीख
द फ्रीलान्स की इस जमीनी और बाजार आधारित पड़ताल से यह साफ होता है कि बायोकॉन जैसी बड़ी कंपनियां हमेशा उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरती हैं। टैक्स नोटिस और विज्ञापन नियमों की जांच अपनी जगह चल रही है, लेकिन व्यापारिक समझौते और कैंसर की दवा का भविष्य कंपनी की असली ताकत को दिखाता है। निवेशकों और आम लोगों को बाजार की हर छोटी-बड़ी खबर पर नजर रखनी चाहिए ताकि वे सही समय पर सही फैसला ले सकें।







