मुंबई/नई दिल्ली ब्यूरो — देश के शेयर बाजार में पिछले कई दिनों से जारी सुस्ती आखिरकार टूट गई। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस और एशियाई बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1100 अंकों से ज्यादा उछल गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी तेजी के साथ 22,450 के अहम स्तर के पार निकल गया। बाजार खुलते ही चौतरफा खरीदारी का माहौल बन गया।
दलाल स्ट्रीट पर सुबह से ही कारोबारियों के चेहरे खिले नजर आए। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से बाजार भारी दबाव में था। विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेच रहे थे। लेकिन इस बार अमेरिकी बाजार से आई अच्छी खबरों ने भारतीय बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया। खासतौर पर सूचना तकनीक यानी आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे तेज उछाल दर्ज किया गया। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने पूरे बाजार को ऊपर खींचने का काम किया।
डाउ जोंस और अमेरिकी बाजार से क्या मिला संकेत?
अमेरिकी शेयर बाजार डाउ जोंस में बीते कारोबारी दिन काफी ठहराव और मजबूती दिखी। वहां महंगाई के नए आंकड़ों यानी सीपीआई डेटा से पहले निवेशकों ने संभलकर खरीदारी की। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इसी उम्मीद के चलते वॉल स्ट्रीट पर बिकवाली का दबाव थम गया। जब डाउ जोंस और नैस्डैक संभले, तो उसका सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ा।
भारतीय समय के अनुसार सुबह खुले गिफ्ट निफ्टी ने भी हरे निशान में कारोबार की शुरुआत की थी। इससे साफ संकेत मिल गया था कि घरेलू बाजार आज बढ़त के साथ खुलेगा। जापान, दक्षिण कोरिया और हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजारों में भी मिलाजुला लेकिन सकारात्मक रुख रहा। विदेशी बाजारों की इस स्थिरता ने भारतीय निवेशकों को खरीदारी का भरोसा दिया। जोखिम लेने वाले कारोबारियों ने सुबह के सत्र में ही बड़े सौदे कर लिए।
आईटी कंपनियों के शेयरों में क्यों मची खरीदारी की होड़?
इस पूरी तेजी में सबसे बड़ा योगदान भारतीय आईटी सेक्टर का रहा। भारत की बड़ी आईटी कंपनियों की कमाई का मुख्य जरिया अमेरिकी और यूरोपीय बाजार हैं। जब डाउ जोंस और तकनीकी शेयरों वाले इंडेक्स नैस्डैक में सुधार होता है, तब भारतीय आईटी कंपनियों को सबसे पहले फायदा मिलता है। कंपनियों के तिमाही नतीजों से पहले निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर पैसा लगाया।
कारोबारियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में आईटी शेयरों में काफी गिरावट आ चुकी थी। कई अच्छी कंपनियों के भाव अपने निचले स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसे में बड़े फंड प्रबंधकों को इन कंपनियों के शेयर सस्ते दामों पर मिले। टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों में एक से तीन फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया। इससे पूरे निफ्टी आईटी इंडेक्स में शानदार तेजी देखने को मिली।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर लगा ब्रेक
बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे थे। वे चीन और अन्य सस्ते बाजारों की तरफ रुख कर रहे थे। लेकिन भारतीय कंपनियों के मजबूत बुनियादी ढांचे और अमेरिकी बाजार की स्थिरता ने इस बिकवाली पर कुछ हद तक ब्रेक लगाया। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी निचले स्तरों पर जमकर खरीदारी की।
घरेलू म्युचुअल फंड और खुदरा निवेशकों के भरोसे ने बाजार को नीचे गिरने से संभाला। जब विदेशी बिकवाली धीमी पड़ी, तो घरेलू खरीदारी का असर सूचकांक पर साफ दिखा। बैंकिंग सेक्टर के बड़े शेयर जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई में भी अच्छी लिवाली देखी गई। ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों ने भी इस तेजी को पूरा सहारा दिया।
छोटे निवेशकों को अब किन बातों का रखना होगा ध्यान?
शेयर बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि एक दिन की बड़ी तेजी देखकर निवेशकों को आंख मूंदकर कूदने से बचना चाहिए। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस में अभी महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिका में आने वाले आर्थिक आंकड़े और आगामी ब्याज दरें बाजार की दिशा तय करेंगी। इसलिए छोटी अवधि के कारोबारियों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय अच्छे बुनियादी शेयरों को धीरे-धीरे जोड़ने का है। बाजार के विश्लेषक मानते हैं कि जब तक निफ्टी अपने नए उच्च स्तर को पार नहीं कर लेता, तब तक बीच-बीच में मुनाफावसूली का दौर आ सकता है। ऐसे में हर बड़ी तेजी पर मुनाफा समेटना और गिरावट पर अच्छे शेयर खरीदना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा। दलाल स्ट्रीट पर आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।





