नई दिल्ली के जीएसटी भवन में आज जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक शुरू हो गई है। देश के वित्त मंत्री और सभी राज्यों के वित्त मंत्री इस अहम बैठक में शामिल हुए हैं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा देश में टैक्स के पुराने नियमों को आसान बनाना और व्यापारियों को राहत देना है। बैठक की शुरुआत से ही कारोबारियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उनके लिए कौन से नए सुधार लेकर आती है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में कई बड़े और कड़े फैसलों पर विचार किया जा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई राज्यों के बड़े नेता और प्रतिनिधि भी इस चर्चा का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। व्यापारियों को लंबे समय से टैक्स फाइलिंग और कानूनी उलझनों से राहत की उम्मीद है, जिस पर आज मुहर लग सकती है।
जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकारों में हो सकता है बड़ा बदलाव
इस बैठक का सबसे बड़ा और चर्चित मुद्दा जीएसटी अधिकारियों द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारियों का है। खबर है कि काउंसिल टैक्स अधिकारियों से गिरफ्तारी का सीधा अधिकार वापस ले सकती है। व्यापारियों लंबे समय से यह शिकायत कर रहे थे कि मामूली चूकों पर भी अधिकारियों द्वारा डराया-धमकाया जाता है और गिरफ्तारियां की जाती हैं।
इसी परेशानी को दूर करने के लिए आपराधिक कार्रवाई की सीमा को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। इस सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि इससे कम राशि के मामलों में सीधे जेल भेजने या गिरफ्तारी की कार्रवाई से बचा जा सकेगा। यह कदम छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित हो सकता है।
व्यापार और उद्योगों पर होगा सीधा असर, कई नए नियमों की घोषणा संभव
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में केवल कानूनी बदलाव ही नहीं, बल्कि आम कारोबार से जुड़े कई अन्य तकनीकी मुद्दों पर भी मंथन चल रहा है। देश में चल रहे बड़े आयोजनों और तकनीकी सेक्टर जैसे इंडिया मोबाइल कांग्रेस जैसे कार्यक्रमों से जुड़े टैक्स ढांचे पर भी चर्चा हो रही है। सरकार का यह प्रयास है कि देश में व्यापार करना और भी आसान बनाया जाए।
राज्यों के प्रतिनिधि अपने-अपने इलाके की टैक्स से जुड़ी समस्याओं को काउंसिल के सामने रख रहे हैं। बैठक के अंत में आने वाले प्रस्तावों से साफ हो जाएगा कि आने वाले दिनों में देश का टैक्स ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ेगा। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरी बैठक पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही आधिकारिक फैसले सामने आएंगे, सबसे पहले आप तक पहुंचाए जाएंगे।
राज्यों की मांग और आम जनता के लिए क्या बदलेगा
बैठक में विभिन्न राज्यों की ओर से राजस्व बंटवारे और मुआवजे के पुराने मुद्दों पर भी बात हो रही है। कई राज्य अपने हिस्से का पैसा समय पर न मिलने की बात उठा चुके हैं। केंद्र सरकार और राज्यों के बीच सहमति बनाने के लिए यह बैठक बहुत अहम मानी जा रही है।
आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों के लिए भी कुछ जरूरी राहतों की घोषणा हो सकती है। रोजमर्रा की इस्तेमाल वाली चीजों पर टैक्स दरों की समीक्षा का काम भी एजेंडे में शामिल है। काउंसिल के इन फैसलों से बाजार में महंगाई और चीजों के दामों पर भी असर पड़ सकता है।







