नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आज जीएसटी काउंसिल की बेहद अहम बैठक हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में देश भर के कारोबारियों और उद्योग जगत की नजरें टिकी हुई थीं। बैठक खत्म होने के बाद वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई बड़े फैसलों की जानकारी दी है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा कारोबारियों के लिए कंप्लायंस यानी नियमों को आसान बनाना और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार करना था। सरकार के इन नए फैसलों से छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक के दौरान मुख्य रूप से टैक्स नोटिस भेजने के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव करने पर मुहर लगाई गई है। अब तक कारोबारियों को मिलने वाले जटिल नोटिस और उनकी वजह से होने वाली परेशानियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। काउंसिल ने यह तय किया है कि नोटिस प्रक्रिया को अब ज्यादा पारदर्शी और सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा, टैक्स रिफंड से जुड़े अटके हुए मामलों को तेजी से निपटाने के लिए भी नए निर्देश जारी किए गए हैं। इससे व्यापारियों का पैसा लंबे समय तक फंसे रहने की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।
कारोबारियों और कंपनियों के लिए राहत के नए नियम
व्यापार जगत लम्बे समय से यह मांग कर रहा था कि टैक्स से जुड़े नियमों में उलझनों को कम किया जाए। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए जीएसटी काउंसिल ने कंप्लायंस सुधारों पर बड़ा फैसला लिया है। अब व्यापारियों को रिटर्न भरने और छोटी-मोटी गलतियों के लिए तुरंत भारी-भरकम पेनल्टी या जटिल कानूनी पचड़ों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार चाहती है कि देश में व्यापार करना और आसान हो, जिसे 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' कहा जाता है। इन बदलावों से कंपनियों और दुकानदारों का कानूनी खर्च और समय दोनों ही बचेंगे।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा और इंश्योरेंस को लेकर भी इस बैठक में एक बड़ा और सकारात्मक ऐलान किया गया है। कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए चलाए जाने वाले इंश्योरेंस प्लान्स पर जीएसटी की स्थिति को लेकर लंबे समय से भ्रम बना हुआ था। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए काउंसिल ने कुछ मामलों में राहत देने का संकेत दिया है, जिससे कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना आसान हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि इससे कॉरपोरेट सेक्टर में कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और बढ़ावा मिलेगा।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के प्रावधानों पर चर्चा
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में केवल टैक्स दरों या नोटिस तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के नियमों पर भी गंभीर चर्चा हुई। कारोबारियों की यह बड़ी शिकायत थी कि मामूली गलतियों या तकनीकी चूकों के लिए भी कई बार कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की तलवार लटक जाती है। काउंसिल ने इन प्रावधानों की समीक्षा की है ताकि ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके और केवल गंभीर और जानबूझकर की गई टैक्स चोरी के मामलों में ही कड़े कदम उठाए जाएं।
राज्यों के प्रतिनिधियों और वित्त मंत्रियों ने भी इस बैठक में अपने-अपने इलाके की टैक्स से जुड़ी समस्याओं को रखा। कई राज्यों ने अपने यहां के राजस्व और रिफंड की स्थिति पर रिपोर्ट पेश की। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया ताकि जीएसटी प्रणाली को देश भर में और अधिक सुचारू रूप से चलाया जा सके। अधिकारी अब इन सभी फैसलों का विस्तृत ब्योरा तैयार कर रहे हैं, जिसे जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना के जरिए लागू किया जाएगा।
कानूनी प्रक्रियाओं और रिटर्न फाइलिंग का भविष्य
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल के मुताबिक, इन बदलावों से जमीनी स्तर पर टैक्सपेयर्स का सिस्टम पर भरोसा और मजबूत होगा। अभी तक कई छोटे कारोबारी जटिल कागजी कार्रवाई और वकीलों के चक्कर से बचने के लिए परेशान रहते थे। काउंसिल के ये नए सुधार अगर सही तरीके से जमीन पर उतरे, तो टैक्स जमा करने की प्रक्रिया काफी हद तक आसान हो जाएगी। आने वाले दिनों में इसके और सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जब सभी नए नियमों की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।







