नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों किसानों और आम लोगों की नजरें इस वक्त आसमान पर टिकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी हर किसी को मानसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग ने हाल ही में मानसून को लेकर एक नया और अहम अपडेट साझा किया है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही देश के कई हिस्सों में राहत की सांस ली गई है। लोग अब गर्मी से राहत पाने के लिए झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार इस साल मानसून के समय पर आने की पूरी संभावना बन रही है। दक्षिण के राज्यों में मानसून सबसे पहले दस्तक देता है और वहां इसकी हलचल शुरू हो चुकी है। केरल के तटों पर बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। हवा का रुख और समुद्र का तापमान इस बात का साफ संकेत दे रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक लगातार इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं।
केरल के तट पर कब पहुंचेगी पहली बौछार?
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख एक जून मानी जाती है। इस बार भी मौसम की चाल को देखकर यही अनुमान लगाया जा रहा है कि बारिश समय पर आ जाएगी। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि अगर स्थितियां अनुकूल रहीं तो यह एक-दो दिन पहले भी पहुंच सकती है। केरल के तटीय इलाकों में पिछले कुछ दिनों से प्री-मानसून बारिश का दौर भी शुरू हो चुका है। इससे उमस भरी गर्मी से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
केरल के बाद यह मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा और देश के बाकी हिस्सों को कवर करेगा। कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसके पहुंचने का पूरा शेड्यूल तैयार कर लिया गया है। प्रशासन ने भी अपनी तरफ से पूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिन इलाकों में हर साल बाढ़ या जलभराव की समस्या होती है, वहां अभी से ही साफ-सफाई और नालों की मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह मौसम?
भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है। देश के लाखों किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही आश्रित रहते हैं। धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी खरीफ की फसलों के लिए यह बारिश जीवनदान जैसी होती है। अगर समय पर अच्छी बारिश हो जाती है तो फसल की पैदावार बंपर होती है। इससे बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम भी नियंत्रण में रहते हैं और महंगाई से राहत मिलती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को इस बार बुवाई के लिए मौसम विभाग की सलाह का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समय से पहले या सही समय पर खेत तैयार करने से बीजों को सही नमी मिलती है। पिछले कुछ सालों में मौसम के बदलते मिजाज के कारण किसानों को कई बार नुकसान का सामना करना पड़ा है। यही वजह है कि इस बार सरकार और कृषि विभाग दोनों ही बहुत सतर्क हैं और किसानों को लगातार जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
मानसून से जुड़ी अन्य जरूरी बातें
इस साल अल नीनो का प्रभाव कमजोर पड़ने की बात सामने आ रही है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। आमतौर पर अल नीनो के कारण भारत में सूखा या कम बारिश की आशंका रहती है, लेकिन इस बार ला नीना की स्थिति बन रही है जो अच्छी बारिश के लिए जानी जाती है। इसका सीधा मतलब है कि देश में इस साल सामान्य से बेहतर बारिश हो सकती है। जल स्रोतों, तालाबों और बड़े बांधों में पानी का स्तर सुधरने की पूरी उम्मीद है।
गर्मी से बेहाल आम जनता अब बस पहली फुहार का इंतजार कर रही है। मौसम विभाग की तरफ से आने वाले दिनों में हर हफ्ते नया बुलेटिन जारी किया जाएगा। जैसे-जैसे मानसून उत्तर भारत की तरफ बढ़ेगा, तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। फिलहाल देश के कई राज्यों में पारा आसमान छू रहा है, ऐसे में यह मानसूनी अपडेट हर किसी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान ले आया है।






