नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक बड़े रोलरकोस्टर यानी ऊपर-नीचे के खेल से गुजर रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में ऐसी तूफानी तेजी आई कि सेंसेक्स एक ही झटके में एक हजार से पंद्रह सौ अंकों तक उछल गया। इसके साथ ही निफ्टी भी मजबूत होकर बाइस हजार नौ सौ के पार निकल गया। इस अचानक आई तेजी से निवेशकों के चेहरों पर खुशी लौट आई। हर तरफ यही चर्चा थी कि बाजार फिर से रफ्तार पकड़ रहा है और निवेशकों को तगड़ा फायदा मिल रहा है।
लेकिन बाजार की यह चमक ज्यादा टिकती नहीं दिख रही है क्योंकि इसमें लगातार गिरावट का दौर भी साथ-साथ चल रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई लगातार अपने शेयर बेच रहे हैं। इसके चलते निफ्टी फिसलकर फिर से बाईस हजार छह सौ पचास के नीचे आ गया है। एनर्जी, तेल-गैस, मीडिया और एफएमसीजी जैसे बड़े सेक्टर के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह स्थिति निवेशकों को भ्रम में डाल रही है कि पैसा लगाएं या सुरक्षित रहें।
आईटी शेयरों की जबरदस्त छलांग और मिडकैप पर दबाव
इस पूरे उतार-चढ़ाव के बीच सबसे बड़ा फायदा आईटी सेक्टर के शेयरों को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी खरीदारी हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी की इस छलांग में सबसे बड़ा हाथ इन्हीं आईटी शेयरों का रहा है। जब भी बाजार खुलता है, आईटी शेयरों में तेजी साफ दिखाई देती है। डीडी न्यूज और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल के दाम कम होने से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिली है, जिससे बाजार को शुरुआती समर्थन मिला है।
दूसरी तरफ, बड़े शेयरों में तेजी के बावजूद छोटे और मंझोले यानी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की हालत पतली है। बाजार विशेषज्ञ अनिल सिंघवी जैसे दिग्गजों का भी मानना है कि बड़े शेयरों में तो खरीदारी का मौका बन रहा है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप के निवेशक अभी भी दबाव में हैं। इन छोटे शेयरों में लगातार बिकवाली हो रही है, जिससे आम छोटे निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में यह अजीब स्थिति है कि एक तरफ हरियाली दिखती है तो दूसरी तरफ लाल निशान डराता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आगे की अनिश्चितता
बाजार में इस भारी उथल-पुथल की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों का रुख है। विदेशी फंड लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे शेयरों के दाम नीचे आ जाते हैं। हालांकि घरेलू निवेशक और म्यूचुअल फंड बाजार को संभालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव बहुत ज्यादा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई हलचल होती है, उसका सीधा असर हमारे शेयर बाजार पर देखने को मिलता है। यही वजह है कि आज बाजार ऊपर है तो कल अचानक नीचे आ जाता है।
आम निवेशकों के लिए इस समय बाजार में टिके रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के उतार-चढ़ाव वाले बाजार में आंख बंद करके पैसा न लगाएं। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी लें और वित्तीय जानकारों की सलाह जरूर सुनें। बाजार की यह चाल कब तक ऐसी रहेगी, यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन सतर्क रहना ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे आर्थिक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू बाजार का कनेक्शन
भारतीय शेयर बाजार की चाल पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का बहुत गहरा असर होता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। तेल सस्ता होने से भारत को बहुत फायदा होता है क्योंकि हमारा देश अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है। तेल के दाम घटने से सरकार का खर्च बचता है और महंगाई पर लगाम लगती है। यही कारण है कि जब भी तेल के दाम गिरते हैं, भारतीय शेयर बाजार में तुरंत जोश आ जाता है और सेंसेक्स-निफ्टी ऊपर भागने लगते हैं।
लेकिन सिर्फ तेल के दाम कम होने से ही बाजार लंबे समय तक नहीं संभल सकता। देश के भीतर कंपनियों की कमाई, महंगाई के आंकड़े और रिजर्व बैंक की नीतियां भी बाजार की दिशा तय करती हैं। जब तक विदेशी निवेशक बिकवाली बंद करके दोबारा भारत में निवेश करना शुरू नहीं करते, तब तक बाजार में ऐसा ही उठापटक जारी रहने की उम्मीद है। आम लोगों को अपनी मेहनत की कमाई बहुत सोच-समझकर और सुरक्षित जगहों पर ही लगानी चाहिए, ताकि अचानक आने वाले गिरावट के झटकों से बचा जा सके।





