नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर यानी अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसिप्ट इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ सत्रों के दौरान इन्फोसिस और विप्रो के एडीआर में अचानक सुस्ती और फिर कभी तेजी का रुख देखने को मिला है। ग्लोबल मार्केट से आ रहे इन संकेतों का सीधा असर अब भारत के शेयर बाजार यानी दलाल स्ट्रीट पर भी साफ महसूस किया जाने लगा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जिसका असर इन कंपनियों की विदेशी चाल पर पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों, खासकर एक्सेंचर के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एक्सेंचर के शेयरों में आई इस एक दिन की ऐतिहासिक कमजोरी ने पूरी दुनिया के तकनीकी बाजारों को हिलाकर रख दिया। इसका असर यह हुआ कि अमेरिका में कारोबार करने वाले इन्फोसिस और विप्रो के एडीआर भी नीचे फिसल गए। भारतीय बाजार में भी निफ्टी आईटी इंडेक्स पर इसका सीधा दबाव देखा गया, जिससे निवेशकों की चिंताएं थोड़ी बढ़ गई हैं। हालांकि, इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ग्लोबल आईटी शेयरों में गिरावट और अमेरिकी बाजार का रुख
अमेरिकी बाजार में तकनीकी शेयरों के बिकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कंपनियों के बजट में कटौती की वजह से आईटी सेक्टर दबाव में है। जब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां कमजोर नतीजे पेश करती हैं, तो उसका असर तुरंत भारतीय कंपनियों के एडीआर पर भी पड़ता है। विप्रो और इन्फोसिस के एडीआर में आई हालिया टूट इसी वैश्विक मंदी की आहट का नतीजा मानी जा रही है। बाजार के विश्लेषक अनिल सिंघवी ने भी निवेशकों को सलाह दी है कि वे वैश्विक बाजारों की चाल पर कड़ी नजर रखें और घबराकर अपने शेयर न बेचें।
दूसरी तरफ, भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस ने अपने तिमाही नतीजे भी जारी कर दिए हैं। कंपनी के मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की घोषणा भी कर दी गई है। इसके बावजूद अमेरिकी बाजार में एडीआर के टूटने से निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या घरेलू आईटी सेक्टर में अभी और कमजोरी आएगी। जानकारों का कहना है कि वैश्विक ग्राहकों की तरफ से नए प्रोजेक्ट मिलने की रफ्तार धीमी हुई है, जिसका असर छोटी और बड़ी दोनों तरह की आईटी कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है।
दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की बेचैनी और आगे की चाल
विदेशी बाजारों के इन उतार-चढ़ाव के बीच भारत के खुदरा निवेशकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से ये शेयर हैं, उन्हें लंबी अवधि के नजरिए से बने रहना चाहिए। हर छोटी गिरावट पर घबराकर शेयर बेचना समझदारी नहीं है, क्योंकि भारतीय आईटी कंपनियों के फंडामेंटल मजबूत हैं और उनका कैश रिजर्व भी अच्छा है। हालांकि, शॉर्ट-ट्रेडर्स के लिए यह समय काफी जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए उन्हें बहुत सोच-समझकर ही बाजार में कदम रखना चाहिए।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिकी बाजार की स्थिति में कब सुधार आता है और भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर फिर से रफ्तार पकड़ पाते हैं या नहीं। बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेक्टरों में नई नियुक्तियों और समझौतों के बीच आईटी शेयरों की यह चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम साबित होगी। दलाल स्ट्रीट के तमाम विश्लेषकों का यही कहना है कि वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू कंपनियों के बिजनेस मॉडल और तिमाही प्रदर्शन पर ही निवेशकों का भरोसा टिका रहेगा।
विशेषज्ञों की सलाह और निवेशकों के लिए जरूरी बातें
बाजार के दिग्गज जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को संयम से काम लेना चाहिए। तकनीकी शेयरों में यह अस्थाई दौर है जो वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आया है। जब तक अमेरिका और यूरोप से नए बिजनेस ऑर्डर्स में तेजी नहीं आती, तब तक शेयरों में सीमित दायरे में ही कारोबार देखने को मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान देने के बजाय केवल आधिकारिक वित्तीय रिपोर्टों और कंपनी के बयानों पर ही भरोसा करें।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ है कि भारतीय आईटी कंपनियां ग्लोबल झटकों का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। भले ही अमेरिकी बाजार में एडीआर कुछ समय के लिए टूटे हों, लेकिन लंबी अवधि में भारतीय तकनीक बाजार की नींव बेहद मजबूत बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के खतरे से कितनी जल्दी उबर पाती है और बड़ी कंपनियां अपने ग्राहकों के साथ किस तरह के नए अनुबंध करती हैं।






