नई दिल्ली से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, देश के वित्तीय और बिजली क्षेत्र में एक बहुत बड़ी हलचल शुरू हो चुकी है। सरकारी क्षेत्र की दो दिग्गज कंपनियों आरईसी लिमिटेड और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन यानी पीएफसी के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित मर्जर की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने इस प्रस्तावित विलय के लिए अपनी हरी झंडी दे दी है। रिजर्व बैंक की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक रूप से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी जारी कर दी गई है। इस बड़ी खबर के सामने आने के बाद से ही शेयर बाजार से लेकर सरकारी गलियारों तक में इसकी चर्चा जोर पकड़ चुकी है।
बाजार के जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विलय के पूरा होने पर देश में ऊर्जा क्षेत्र को कर्ज देने वाली एक बेहद मजबूत और विशालकाय कंपनी तैयार होगी। आरईसी लिमिटेड ने खुद शेयर बाजार को दी गई अपनी आधिकारिक जानकारी में इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक से यह जरूरी मंजूरी मिल चुकी है। पिछले काफी समय से इन दोनों कंपनियों के एकीकरण को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब केंद्रीय बैंक की इस मंजूरी के बाद इस बात पर मुहर लग गई है कि दोनों कंपनियों को एक करने की योजना कानूनी और तकनीकी रूप से सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
रिजर्व बैंक की एनओसी मिलने से क्यों बढ़ गई है उम्मीदें?
किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी वित्तीय संस्थान के विलय के लिए देश के केंद्रीय बैंक की मंजूरी सबसे मुश्किल और अहम बाधा मानी जाती है। रिजर्व बैंक यह देखता है कि इस तरह के विलय से देश की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सिस्टम और निवेशकों के हितों पर क्या असर पड़ेगा। आरबीआई की तरफ से एनओसी मिलने का सीधा मतलब यह है कि केंद्रीय बैंक ने इस विलय के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को प्राथमिक स्तर पर परख लिया है। इस बड़ी मंजूरी के मिलने के बाद अब दोनों कंपनियों का प्रबंधन अपनी अगली कानूनी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करने में जुट गया है ताकि बिजली सेक्टर को मजबूत करने का यह काम जल्द से जल्द पूरा हो सके।
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि रिजर्व बैंक की एनओसी मिल जाना ही इस पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं है। अभी इस विलय के रास्ते में कुछ और कानूनी पड़ाव बाकी हैं जिन्हें पार करना बेहद जरूरी है। नियमों के मुताबिक, इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कंपनी के शेयरधारकों और कर्ज देने वाले लेनदारों की औपचारिक मंजूरी लेना अभी बाकी है। जब तक शेयरधारक और लेनदार इस प्रस्ताव के पक्ष में अपना पूर्ण बहुमत नहीं दे देते, तब तक इस विलय को पूरी तरह अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता है। आने वाले कुछ हफ्तों में इन बैठकों और मंजूरियों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर क्या होगा इसका बड़ा असर?
आरईसी लिमिटेड और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन दोनों ही कंपनियां देश भर की बिजली परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर कर्ज और वित्तीय मदद देती हैं। जब ये दोनों ताकतवर कंपनियां आपस में मिल जाएंगी, तो इनकी कुल वित्तीय क्षमता और कर्ज देने की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। देश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को समय पर फंड मिलने में कोई परेशानी नहीं होगी। सरकार का यह कदम देश के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और बुनियादी ढांचे के विकास को तेज गति देने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि दोनों कंपनियों के मिलने से प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी और कामकाज में तेजी आएगी। बाजार नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करते हुए आरईसी और पीएफसी के अधिकारी अब अगली बैठकों की तैयारी में लगे हैं। जैसे-जैसे शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, इस मेगा मर्जर की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। हमारी टीम इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।







