नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह से ही हाहाकार मचा हुआ है। कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। सेंसेक्स में 1100 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है। निफ्टी भी लुढ़ककर 22200 के स्तर पर आ गया है। इस अचानक आए भूचाल से निवेशकों की गाढ़ी कमाई कुछ ही घंटों में साफ हो गई है। बाजार में छाई इस मंदी से हर तरफ चिंता का माहौल है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई हफ्तों से बाजार लगातार दबाव में चल रहा था। यह लगातार आठवां हफ्ता है जब बाजार फिसलता नजर आ रहा है। आज के कारोबार में मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। इन सेक्टरों के शेयरों में निवेशकों की भारी भगदड़ मच गई। छोटे और मंझोले निवेशकों को इस गिरावट से सबसे बड़ा झटका लगा है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अचानक बाजार इस तरह क्यों टूट गया।
बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पांच बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। विदेशी निवेशकों लगातार अपना पैसा भारतीय बाजार से निकाल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल बाजारों में कमजोरी का रुख बना हुआ है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी निवेशकों को डरा रही है। इन सभी वजहों से बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगड़ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच निवेशकों के करीब आठ लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। टाटा, रिलायंस और अडानी जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। जानकारों का कहना है कि बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जो लोग लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बहुत संभलकर चलने का है। बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।
लगातार गिरते सूचकांक और मंदी की आशंका पर निवेशकों की चिंता
दैनिक कारोबार के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाजार पिछले 25 सालों के ऐसे दौर के करीब पहुंच गया है जहां लगातार कई हफ्तों तक गिरावट दर्ज हुई थी। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों के इंडेक्स अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ चुके हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक ग्लोबल संकेत सुधरते नहीं हैं, तब तक घरेलू बाजार में राहत की उम्मीद कम है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर अपने शेयर औने-पौने दामों में न बेचें।
जमीनी स्तर पर ब्रोकरेज फर्मों और वित्तीय सलाहकारों के दफ्तरों में फोन घनघना रहे हैं। निवेशक अपने पोर्टफोलियो को लेकर काफी डरे हुए हैं। हर कोई जानना चाहता है कि बाजार कबसंभलेगा और उनका डूबा हुआ पैसा वापस कब आएगा। फिलहाल बाजार के रुख को देखकर यही लगता है कि उतार-चढ़ाव का यह दौर अभी कुछ और दिन जारी रह सकता है। आम निवेशकों को अपनी वित्तीय स्थिति देखकर ही अगला कदम उठाना चाहिए।
आगे की चाल और निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि इस भारी गिरावट ने बाजार की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। छोटी अवधि के ट्रेडर्स को इस समय सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। जानकारों का कहना है कि जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक नई पोजीशन बनाने से बचना चाहिए। म्यूचुअल फंड और एसआईपी के जरिए निवेश करने वालों को अपनी रणनीति जारी रखनी चाहिए। उन्हें बाजार की इस उथल-पुथल से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि लंबी अवधि में बाजार हमेशा रिकवरी करता है।





