नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन बेहद डरावना साबित हुआ है। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि देखते ही देखते सेंसेक्स 1200 अंकों से ज्यादा टूट गया। इस अचानक आई भारी गिरावट से निवेशकों की गाढ़ी कमाई कुछ ही मिनटों में स्वाहा हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स गिरकर 71,593 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी बुरी तरह पस्त होकर 22,232 के आसपास आ गया है। इस बड़ी गिरावट ने पिछले कई हफ्तों से बनी तेजी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और बाजार में हर तरफ कोहराम मचा हुआ है।
बाजार के जानकारों और दलाली फर्मों के मुताबिक, इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के हालिया फैसलों और वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया है। मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में तो जैसे भगदड़ सी मच गई। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में भारी बिकवाली के चलते छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है और वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अब अपना पैसा कहां बचाएं।
मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे बड़ी बिकवाली
आज के कारोबार में सबसे बुरा हाल मेटल और हेल्थकेयर शेयरों का रहा। बाजार में जैसे ही बिकवाली का दौर शुरू हुआ, इन दोनों सेक्टरों के शेयरों के दाम धड़ाम से नीचे गिर गए। निवेशकों ने बिना सोचे-समझे अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे इनके भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस भारी उठापटक के बीच टाटा समूह के कुछ शेयरों में जरूर कुछ राहतभरी चाल दिखी और उन्होंने अच्छी बढ़त दर्ज की, लेकिन यह तेजी पूरे बाजार को थामने के लिए काफी नहीं थी। बाकी के ज्यादातर सेक्टर लाल निशान पर बंद हुए और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
बैंक शेयरों का हाल भी बहुत बुरा रहा और निफ्टी बैंक करीब 540 अंक लुढ़ककर 54,515 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग सेक्टर में आई इस कमजोरी ने बाजार की रीढ़ तोड़ दी है। सरकारी और निजी दोनों ही बैंकों के शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ देखा गया। जानकारों का कहना है कि जब तक बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक बाजार का संभलना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है। छोटे निवेशक इस समय पूरी तरह सहमे हुए हैं और अपने पोर्टफोलियो को बचाने की जुगत में लगे हैं।
रिजर्व बैंक के रुख और वैश्विक कारणों का असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया आर्थिक फैसलों ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया है। ब्याज दरों और महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख बाजार को रास नहीं आया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय निवेशकों का हौसला तोड़ा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी का संकट भी गहराता जा रहा है, जिसका सीधा असर सूचकांकों पर पड़ रहा है।
मैदान पर हमारी पड़ताल बताती है कि ब्रोकरेज हाउस और वित्तीय सलाहकार इस समय निवेशकों को संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं। घबराहट में आकर अपने अच्छे शेयर औने-पौने दामों पर बेचने से बचने को कहा जा रहा है। बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि यह गिरावट भले ही डरावनी है, लेकिन यह बाजार का एक चक्र है जो समय के साथ सुधर भी सकता है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए छोटे निवेशकों को किसी भी नए निवेश से पहले बेहद सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है।
बाजार में आगे की चाल और निवेशकों के लिए सलाह
आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है और घरेलू संस्थान बाजार में खरीदारी बढ़ाते हैं, तो ही बाजार में कुछ सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और हर छोटी खबर पर निवेशकों की पैनी नजर टिकी हुई है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की बड़ी गिरावट से यह साफ हो जाता है कि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है। बिना पूरी जानकारी और सोचे-समझे पैसा लगाने वालों को ऐसे समय में सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों की यही सलाह है कि लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही पैसा लगाएं और किसी भी तरह की अफवाह या जल्दबाजी में आकर भारी नुकसान उठाने से बचें।




