नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। इस कारोबारी हलचल के बीच टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाइटन के शेयरों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सितंबर तिमाही के वित्तीय आंकड़ों और बिजनेस अपडेट के सामने आने के बाद निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। जानकारों के अनुसार, बाजार में चल रहे बुल बनाम बेयर के संघर्ष के बीच टाइटन के शेयरों पर काफी दबाव देखा जा रहा है। एक दिन के कारोबार में कंपनी के शेयरों में चार प्रतिशत से ज्यादा की सुस्ती आई है जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि टाइटन के शेयरों में यह गिरावट केवल कंपनी के प्रदर्शन की वजह से नहीं है। पूरे शेयर बाजार में बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है जिसके कारण टाइटन, बीईएल और एशियन पेंट्स जैसे बड़े शेयरों को भी तगड़ा नुकसान हुआ है। शुरुआती कारोबार में बढ़त बनाने की कोशिश के बाद बाजार अचानक लुढ़क गया। इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों की त्यौरियां चढ़ा दी हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। छोटे और मझोले निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें इस गिरावट में शेयर खरीदने चाहिए या अपने पास मौजूद शेयर बेच देने चाहिए।
ज्वेलरी और घड़ियों की मजबूत बिक्री के बावजूद शेयर गिरे
दिलचस्प बात यह है कि टाइटन कंपनी ने अपनी सितंबर तिमाही के शुरुआती आंकड़ों में शानदार कारोबार का दावा किया था। कंपनी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ज्वेलरी से लेकर घड़ियों तक के सेगमेंट में ग्राहकों की तरफ से मजबूत मांग देखने को मिली थी। कंपनी का कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर पच्चीस प्रतिशत तक बढ़ा है जो कि एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा था। इसके अलावा टाइटन के लोकप्रिय ब्रांड कैटवॉक यानी कैरटलेन की बिक्री में भी बत्तीस प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद शेयर बाजार के निवेशकों ने इन आंकड़ों पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया और बिकवाली का रास्ता चुना।
विश्लेषकों का मानना है कि तिमाही नतीजों में ग्रोथ अच्छी होने के बाद भी शेयरों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा चल रहा था। जब किसी शेयर का दाम उसकी असल कमाई के मुकाबले काफी आगे निकल जाता है तो छोटी सी भी कमजोरी पर मुनाफावसूली शुरू हो जाती है। टाइटन के मामले में भी यही हुआ है क्योंकि निवेशक ऊंचे दामों पर अपना मुनाफा सुरक्षित करना चाहते थे। इसके अलावा त्योहारी सीजन से पहले बाजार के बड़े खिलाड़ियों का रुख थोड़ा सतर्क हो गया है। वे किसी भी बड़े जोखिम से बचने के लिए अपने पोर्टफोलियो को हल्का कर रहे हैं जिसका सीधा असर टाइटन जैसे दिग्गज शेयरों पर दिखाई दे रहा है।
बिकवाली के इस दौर में निवेशकों के लिए आगे की राह
शेयर बाजार के जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को घबराहट में आकर अपने शेयर औने-पौने दामों पर नहीं बेचने चाहिए। टाइटन जैसी मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों का पिछला रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है और लंबी अवधि के निवेशकों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कंपनी का व्यापारिक मॉडल मजबूत है और आने वाले महीनों में शादियों के सीजन के कारण मांग में और तेजी आने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, शॉर्ट-ट्रेडिंग करने वालों को बाजार की इस अस्थिरता से सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।
एक तरफ जहां टाइटन के शेयर बाजार में सुस्त नजर आ रहे हैं, वहीं कंपनी सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े कामों में भी लगातार सक्रिय बनी हुई हाल ही में टाइटन की तरफ से एक विशेष साइकिल रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत करना और आम जनता को हरित आवागमन के प्रति जागरूक करना था। आर्थिक मोर्चे पर भले ही अभी शेयरों में कमजोरी दिख रही हो, लेकिन कंपनी का जमीनी कामकाज और ग्राहकों के बीच साख अभी भी पूरी तरह मजबूत बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर में तेजी और मंदी के नए ट्रिगर्स
मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में टाइटन के शेयरों की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि त्योहारी सीजन में ग्राहकों की खरीददारी कैसी रहती है। यदि त्योहारी मांग उम्मीद से बेहतर रही तो शेयरों में फिर से तेजी लौट सकती है। वहीं दूसरी ओर यदि वैश्विक बाजारों से नकारात्मक संकेत आते रहे तो शेयर कुछ और समय तक दबाव में रह सकते हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि निवेशकों को हर छोटी खबर पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।






