नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश में डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के मन में इन दिनों एक ही सवाल बार-बार घूम रहा है। क्या अब गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे ऐप्स से पैसे भेजने पर भी अतिरिक्त चार्ज देना पड़ेगा? पिछले कुछ दिनों से यह खबर बाजार में आग की तरह फैली है कि दो हजार रुपये से ऊपर के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर चार्ज लग सकता है। इस खबर के सामने आने के बाद से आम आदमी से लेकर छोटे दुकानदारों तक की चिंता बढ़ गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या उनकी रोजमर्रा की डिजिटल पेमेंट अब महंगी होने वाली है।
सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि यह नया नियम पंद्रह अक्टूबर से लागू होने जा रहा है। जैसे ही यह बात फैली, डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले यूजरों के बीच खलबली मच गई। लेकिन 'द फ्रीलान्स' की टीम ने जब इस मामले की गहराई से पड़ताल की, तो कुछ और ही कहानी सामने आई। पता चला कि इस बारे में अभी तक कोई भी अंतिम और आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। एनपीसीआई यानी नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से इस मुद्दे पर लगातार बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के साथ बातचीत की जा रही है।
क्या 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है नया नियम?
हमारी जमीनी पड़ताल और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पंद्रह अक्टूबर से यूपीआई पर किसी भी तरह का नया चार्ज लगने की बात पूरी तरह सच नहीं है। मनीकंट्रोल और न्यूज18 की रिपोर्ट्स में भी यह साफ किया गया है कि अभी तक इस बारे में कोई पक्की तारीख तय नहीं हुई है। सरकार और रिजर्व बैंक का साफ रुख रहा है कि डिजिटल भुगतान को देश में और ज्यादा बढ़ावा दिया जाए। ऐसे में बिना सोचे-समझे कोई भी ऐसा कदम उठाना मुश्किल है जिससे आम जनता का भरोसा डिजिटल पेमेंट से उठे। छोटे व्यापारियों को भी इस बात की बड़ी राहत मिलती दिख रही है कि फिलहाल उनके लेन-देन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
दूसरी तरफ, बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर लगातार यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें यूपीआई ट्रांजैक्शन से होने वाले खर्च को संभालने के लिए कुछ कमाई का जरिया मिलना चाहिए। अभी ज्यादातर यूपीआई पेमेंट मुफ्त में होते हैं, जिसका पूरा खर्च बैंक और सरकार मिलकर उठाते हैं। बैकिंग जानकारों का मानना है कि इस भारी-भरकम ढांचे को लंबे समय तक मुफ्त चलाना आसान नहीं है। यही वजह है कि एमडीआर चार्ज या मर्चेंट फीस लगाने पर अंदरखाने लगातार विचार चल रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह नियम रातों-रात लागू कर दिया जाएगा।
क्या जनवरी तक टल सकता है एमडीआर चार्ज का फैसला?
बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकार और नियामक संस्थाएं इस मामले में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। त्योहारों का सीजन सिर पर है और ऐसे में किसी भी नए शुल्क की घोषणा से बाजार की रफ्तार सुस्त हो सकती है। यही वजह है कि इस पूरे मामले को जनवरी तक टाले जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जब तक सभी पक्षों यानी बैंक, फिनटेक कंपनियों और सरकार के बीच आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक कोई भी नया नियम लागू होने की उम्मीद बेहद कम है। आम जनता को इस बात से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है कि उन्हें कल से ही पैसे चुकाने पड़ेंगे।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब बाजार के कुछ प्रमुख दुकानदारों से बात की, तो उनका कहना था कि अगर यूपीआई पर चार्ज लगा, तो उनका कारोबार प्रभावित होगा। छोटे ग्राहक अक्सर छोटे अमाउंट के लिए ही डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। अगर इस पर कोई भी शुल्क लगता है, तो लोग फिर से नकदी यानी कैश की तरफ लौट सकते हैं। इसलिए सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले आम आदमी और छोटे कारोबारियों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखना होगा। आने वाले कुछ हफ्तों में एनपीसीआई की तरफ से इस पर स्थिति पूरी तरह साफ किए जाने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा और ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए
फिलहाल स्थिति यह है कि यूपीआई पेमेंट पूरी तरह मुफ्त है और आपको किसी भी तरह का एमडीआर या अतिरिक्त शुल्क देने की कोई आवश्यकता नहीं है। सोशल मीडिया पर चल रही तमाम तरह की अफवाहों पर ध्यान देने से बचने की सलाह दी जाती है। जब भी इस बारे में कोई आधिकारिक सर्कुलर या नियम आएगा, उसकी सही जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचाई जाएगी। तब तक आप बिना किसी डर और झिझक के अपने फोन से पहले की तरह ही बेझिझक डिजिटल लेनदेन जारी रख सकते हैं।







