नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय वित्तीय बाजार में इन दिनों आम आदमी की बचत और निवेश को लेकर काफी हलचल मची हुई है। देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसलों के बाद से ही तमाम बड़े और छोटे कमर्शियल बैंकों ने अपनी फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी ब्याज दरों को नए सिरे से तय करना शुरू कर दिया है। लगातार बदलती आर्थिक परिस्थितियों, कमजोर मानसून की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच बैंक लगातार ग्राहकों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया का सीधा असर आम आदमी की जेब और उसकी छोटी-छोटी बचतों पर पड़ रहा है, जो बैंक में पैसा जमा करके सुरक्षित मुनाफा कमाना चाहते हैं।
देश के कई नामी बैंकों ने हाल ही में अपनी अलग-अलग अवधि वाली एफडी योजनाओं के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बाजार में मिल रही ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बैंक अब ग्राहकों को तीन साल या उससे कम अवधि की जमा योजनाओं पर भी 7.8 प्रतिशत तक का ठोस रिटर्न ऑफर कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ खास छोटे वित्तीय बैंक और चुनिंदा निजी बैंक तो ऐसे भी हैं जो अपनी विशेष योजनाओं के तहत निवेशकों को 8.75 प्रतिशत तक का बंपर ब्याज दे रहे हैं। बैंक जानकारों का मानना है कि महंगाई के इस दौर में सुरक्षित निवेश का जरिया ढूंढ रहे मध्यम वर्ग के लिए यह एक अच्छा मौका साबित हो सकता है, बशर्ते वे निवेश करने से पहले सभी नियमों को ध्यान से पढ़ लें।
कमजोर मानसून और महंगाई के बीच बैंकों का यह दांव क्यों है अहम?
मौजूदा समय में देश के भीतर महंगाई दर और आर्थिक विकास के आंकड़ों को लेकर लगातार समीक्षाएं हो रही हैं। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में यह बात बार-बार सामने आई है कि आम आदमी की खर्च करने की क्षमता और बाजार में नकदी के प्रवाह को संतुलित रखना कितना जरूरी है। एक तरफ जहां कमजोर मानसून के कारण ग्रामीण इलाकों में मांग प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने-बढ़ने से घरेलू स्तर पर महंगाई का डर बना हुआ है। ऐसे हालात में बैंक चाहते हैं कि आम लोग अपना पैसा म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार के जोखिम भरे रास्तों की बजाय पारंपरिक और सुरक्षित बैंक खातों में ही रखें, ताकि बैंकों के पास लोन देने के लिए पर्याप्त पूंजी बनी रहे।
बैंकों के इसी प्रयास का नतीजा है कि वे अब एफडी पर पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज दरें दे रहे हैं ताकि ग्राहकों का मोहभंग न हो। सामान्य तौर पर जब भी ब्याज दरों में फेरबदल की सुगबुगाहट होती है, तो वरिष्ठ नागरिकों यानी सीनियर सिटीजंस को सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। अधिकांश बैंक सामान्य ग्राहकों की तुलना में बुजुर्गों को आधा प्रतिशत यानी 0.50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त ब्याज देते हैं। ऐसे में अगर कोई वरिष्ठ नागरिक किसी ऐसे बैंक में तीन साल की एफडी कराता है जो 7.8 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज दे रहा है, तो उन्हें मिलने वाला कुल रिटर्न और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है। यही कारण है कि इन दिनों बैंकों की शाखाओं में फिक्सड डिपॉजिट कराने वाले लोगों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।
8.75 प्रतिशत तक के तगड़े रिटर्न वाली एफडी का सच और शर्तें
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल के दौरान यह बात सामने आई है कि 8.75 प्रतिशत तक का भारी-भरकम ब्याज हर बैंक और हर आम ग्राहक को सामान्य रूप से नहीं मिल रहा है। इस तरह की उच्च ब्याज दरों का लाभ उठाने के लिए कुछ खास शर्तें जुड़ी होती हैं। देश के कुछ चुनिंदा छोटे वित्त बैंक यानी स्मॉल फाइनेंस बैंक इस प्रकार की ऊंची ब्याज दरें उन ग्राहकों को दे रहे हैं जो या तो वरिष्ठ नागरिक हैं या फिर जिन्होंने एक तय समय सीमा के भीतर अपनी पूंजी को लॉक इन किया है। इसके अलावा, कुछ बैंक केवल 400 दिन या 500 दिन जैसी खास अवधि वाली स्पेशल स्कीमों पर ही यह फायदा दे रहे हैं, इसलिए निवेश करने से पहले इन छोटी-छोटी तकनीकी बातों को समझना बहुत जरूरी है।
बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि निवेशकों को केवल ऊंचे ब्याज के आंकड़ों को देखकर ही अपना सारा पैसा किसी एक बैंक में नहीं झोंक देना चाहिए। रिजर्व बैंक के नियमों के तहत देश के शेड्यूल बैंकों में जमा आपका पांच लाख रुपए तक का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है, क्योंकि इस पर डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलता है। फिर भी, बैंक की वित्तीय सेहत, उसकी साख और समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाले पेनल्टी चार्ज की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। यदि आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही समय अवधि चुनते हैं, तो आप इन बढ़ी हुई ब्याज दरों का पूरा फायदा उठाकर अपने पैसों को सुरक्षित तरीके से बढ़ा सकते हैं।
एफडी कराने से पहले आम निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप भी बैंक की इन नई और बढ़ी हुई एफडी दरों का लाभ उठाने का मन बना चुके हैं, तो कुछ जरूरी बातों को गांठ बांध लेना चाहिए। सबसे पहले यह तय करें कि आपको वह पैसा कितने समय के लिए नहीं चाहिए, क्योंकि एफडी बीच में तोड़ने पर बैंक आपसे जुर्माना वसूल सकते हैं जिससे आपका फायदा कम हो सकता है। दूसरा, टैक्स के नियमों को भी अच्छी तरह समझ लें क्योंकि पारंपरिक एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से आयकर कटता है। यदि आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो पांच साल की टैक्स सेविंग एफडी का विकल्प भी चुन सकते हैं, हालांकि उसमें लॉक इन पीरियड अनिवार्य होता है।
कुल मिलाकर कहें तो, बैंकों की तरफ से एफडी दरों में की गई यह बढ़ोतरी उन लोगों के लिए राहत की सांस लेकर आई है जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई पर निश्चित रिटर्न चाहते हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस बात पर लगातार नजर बनाए रखेगी कि आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक के अगले फैसलों के बाद बैंक ब्याज दरों में क्या और नए बदलाव करते हैं। फिलहाल, ग्राहकों के पास यह सुनहरा मौका है कि वे अपने नजदीकी या भरोसेमंद बैंक की अलग-अलग योजनाओं की तुलना करके अपनी बचत को सबसे ज्यादा मुनाफे वाली जगह पर निवेश करें।



