कोलकाता के ऐतिहासिक साल्टलेक स्टेडियम में भारतीय फुटबॉल का सबसे बड़ा और पुराना मुकाबला खेला गया। मैदान पर मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की टीमें आमने-सामने थीं। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में हर कोई अपनी पसंदीदा टीम का हौसला बढ़ा रहा था। इस हाई-वोल्टेज मैच में दोनों तरफ से शानदार खेल का प्रदर्शन किया गया।
मैच का सबसे बड़ा पल दूसरे हाफ में आया जब जेल्जकोविच ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए गोल दाग दिया। इस गोल ने मैच का रुख पूरी तरह से बदल दिया। ईस्ट बंगाल के खिलाड़ियों ने बराबरी करने की पूरी कोशिश की लेकिन मोहन बागान की मजबूत रक्षा पंक्ति ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया। रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही मोहन बागान के खेमे में जश्न शुरू हो गया। टीम के खिलाड़ियों और समर्थकों ने मैदान पर ही जीत का जश्न मनाया।
जेल्जकोविच के गोल से लिखी गई जीत की इबारत
इस खिताबी मुकाबले में मोहन बागान की ओर से खेलने वाले जेल्जकोविच हीरो साबित हुए। उनका लगाया गया एकमात्र गोल टीम को जीत दिलाने के लिए काफी था। मैच के बाद खिलाड़ियों ने मीडिया से बात करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह जीत टीम की मेहनत और प्रशंसकों के समर्थन का नतीजा है। फाइनल में पहुंचने से पहले मोहन बागान ने सेमीफाइनल मुकाबले में पंजाब एफसी को कड़े पेनल्टी शूटआउट में हराया था।
पंजाब एफसी के खिलाफ उस जीत ने टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा दिया था। फाइनल मुकाबले में भी खिलाड़ियों का वही जोश मैदान पर साफ नजर आया। कोच और प्रबंधन ने भी टीम के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। दूसरी ओर, ईस्ट बंगाल की टीम ने भी फाइनल तक का सफर तय करने में बेहतरीन खेल दिखाया था लेकिन अंतिम बाधा पार करने में असफल रही।
पचास साल बाद दोहराया इतिहास और जीता डबल खिताब
इस खिताबी जीत के साथ ही मोहन बागान ने पचास साल पुराना इतिहास फिर से दोहरा दिया है। कलकत्ता फुटबॉल लीग यानी सीएफएल का खिताब जीतने के बाद अब आईएफए शील्ड अपने नाम करना क्लब के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह साल मोहन बागान के इतिहास के सबसे बेहतरीन सालों में से एक है। एक ही सत्र में दो बड़े खिताब जीतना आसान नहीं होता है।
क्लब के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह सफलता आने वाले समय में युवा खिलाड़ियों को और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगी। साल्टलेक स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसकों के लिए यह शाम हमेशा के लिए यादगार बन गई। मैच के बाद कोलकाता की सड़कों पर मोहन बागान के समर्थकों ने जश्न मनाया। आतिशबाजी की गई और मिठाइयां बांटी गईं।
कोलकाता फुटबॉल का पुराना और सुनहरा रंग
कोलकाता में मोहन बागान और ईस्ट बंगाल का मुकाबला हमेशा से फुटबॉल प्रेमियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता है। इस बार के आईएफए शील्ड फाइनल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय फुटबॉल में इन दोनों टीमों का क्रेज कितना ज्यादा है। मैदान पर खिलाड़ियों की जंग और मैदान के बाहर समर्थकों का उत्साह खेल की असली खूबसूरती को बयान करता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, मैच के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात था। खेल खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खेल प्रेमियों ने अनुशासन का परिचय दिया। इस जीत के साथ मोहन बागान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह इस खेल के असली सिकंदर हैं।






