रियाद/नई दिल्ली — सऊदी अरब की कानून व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। खाड़ी देश के अधिकारियों ने मक्का की एक प्रतिष्ठित मस्जिद के भीतर बेहद अश्लील हरकत करने वाले एक बांग्लादेशी जोड़े को मौत की सजा सुना दी है। इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बीच भारी सनसनी फैला दी है। सऊदी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और देश के कानूनों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह घटना मक्का की एक प्रमुख मस्जिद के अंदर घटी थी। आरोपी बांग्लादेशी दंपती ने मस्जिद के पवित्र परिसर में कथित तौर पर अनैतिक और अश्लील हरकतें की थीं। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने इस कृत्य को तुरंत पकड़ लिया और दोनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की गहन जांच की और आरोपियों को विशेष अदालत के सामने पेश किया, जहां से उन्हें यह कठोर सजा सुनाई गई है।
मक्का की मस्जिद में अनैतिक कृत्य पर उठा बड़ा सवाल
सऊदी अरब में इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा और वहां के नियमों का पालन बेहद सख्ती से कराया जाता है। गैर-मुल्कों से रोजी-रोटी की तलाश में आने वाले लोगों के लिए वहां के कायदे-कानून पहले से ही बहुत कड़े माने जाते हैं। इस मामले में भी अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पवित्र स्थल की मर्यादा को ठेस पहुंचाना एक गंभीर अपराध है। आरोपी जोड़े के खिलाफ मिले डिजिटल सबूत और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अदालत ने बिना किसी नरमी के मौत का यह कड़ा फैसला सुनाया है।
इस घटना के बाद बांग्लादेशी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। हालांकि, सऊदी कानूनों के जानकारों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर अशिष्टता या नियमों का उल्लंघन करने पर वहां की न्यायपालिका अत्यंत कठोर रुख अपनाती है। सजा पाने वाले जोड़े के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी अन्य जानकारियां स्थानीय प्रोटोकॉल के तहत अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन सजा की पुष्टि होने के बाद से यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है.
प्रवासी मजदूरों के लिए खाड़ी देशों के सख्त सबक
सऊदी अरब में लाखों की संख्या में दक्षिण एशियाई देशों के नागरिक काम करते हैं। इनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के मजदूर शामिल हैं। इस प्रकार की घटनाएं वहां काम कर रहे अन्य विदेशी नागरिकों के लिए एक बड़ा सबक और चेतावनी साबित होती हैं। सऊदी प्रशासन अक्सर अपनी सार्वजनिक घोषणाओं में यह बात दोहराता है कि देश के सांस्कृतिक और धार्मिक कानूनों का सम्मान करना हर प्रवासी नागरिक की पहली और अनिवार्य जिम्मेदारी है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ होता है कि खाड़ी देशों में छोटी सी गलती भी कितनी भारी पड़ सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद बांग्लादेश के दूतावास के अधिकारी भी स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि कानूनी प्रक्रियाओं का जायजा लिया जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी कुछ चर्चाएं होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि सऊदी कानून के आगे विदेशी हस्तक्षेप की गुंजाइश बेहद कम होती है।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की स्थिति
सऊदी अरब की अदालतों में इस तरह के मामलों की सुनवाई बेहद गोपनीय और तेज गति से पूरी की जाती है। इस दंपती को भी अपनी सफाई देने का मौका दिया गया था, लेकिन उनके कृत्य के वीडियो सबूत इतने पुख्ता थे कि बचाव पक्ष के पास कहने के लिए कुछ खास नहीं बचा था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सजा की पुष्टि होने के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार समूहों की प्रतिक्रियाओं को भी खंगाला जा रहा है। खाड़ी के देशों में कड़े कानूनों के तहत मिलने वाली ऐसी सजाएं हमेशा से बहस का मुद्दा रही हैं, लेकिन सऊदी सरकार का रुख इन मामलों में हमेशा से शून्य सहनशीलता का रहा है। प्रवासियों को अब और अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है ताकि वे किसी भी अनपेक्षित कानूनी संकट से बच सकें।





