नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — वैश्विक आर्थिक गलियारों से इस वक्त बड़ी और चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भारी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। हांगकांग का प्रमुख बाजार सूचकांक 'हैंग सेंग' भी इस मंदी की चपेट में आ गया है। ऑयल-बॉन्ड यील्ड के डबल प्रेशर यानी कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी बॉंड की बढ़ती कमाई के कारण एशियाई बाजारों में निवेशकों में घबराहट साफ दिख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक स्तर पर महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं का नतीजा है। ऐसे समय में जब विदेशी बाजारों में सुस्ती छाई हुई है, भारतीय शेयर बाजारों का उस दिन बंद रहना यहां के निवेशकों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हफ्ते अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के जनवरी महीने के मिनट्स यानी बैठकों के ब्योरे जारी होने वाले हैं। इसके अलावा अमेरिका के चौथी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के अनुमानित आंकड़े और पीसीई यानी व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक के आंकड़े भी आने वाले हैं। इन सभी महत्वपूर्ण ग्लोबल डेटा पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर टिकी हुई है। यही वजह है कि अमेरिकी बाजारों के पिछले सत्र में बंद रहने के बावजूद, फ्यूचर्स बाजार में तीनों प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स एक सीमित दायरे में ही कारोबार करते नजर आए। जब तक ये बड़े आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना रहने की पूरी उम्मीद है।
घरेलू बाजार रहे सुरक्षित, रिलायंस और एसबीआई शेयरों पर टिकी नजर
जब एशियाई और वैश्विक बाजारों में यह उथल-पुथल मची हुई थी, तब राहत की बात यह रही कि भारतीय शेयर बाजार छुट्टी के कारण बंद थे। हालांकि, जब बाजार खुले तो शुरुआती तेजी के बाद मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई जैसे देश के दिग्गज शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इन बड़े शेयरों में गिरावट आने के कारण बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और अंत में मामूली उतार-चढ़ाव के साथ बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि वैश्विक दबाव के बीच भारतीय बाजार अपनी चाल खुद तय करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्लोबल संकेतों की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती है।
कारोबारियों और निवेशकों के मन में अब यही सवाल है कि निफ्टी और बैंक निफ्टी में आगे की चाल कैसी रहेगी। बाजार के दिग्गज विश्लेषक निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौजूदा स्तरों पर बहुत सतर्क रहें। निफ्टी और बैंक निफ्टी में अहम सपोर्ट लेवल पर खास नजर रखने की जरूरत है ताकि किसी भी अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। खरीदारी या बिकवाली करने से पहले तकनीकी चार्ट्स पर मजबूत सपोर्ट और रेजिस्टेंस की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए इन दिनों बाजार की चाल को समझना और बिना स्टॉप लॉस के काम करना खतरनाक साबित हो सकता है।
हैंग सेंग और टेक इंडेक्स की स्थिति से क्या सीखें शुरुआती निवेशक
जो लोग वैश्विक बाजारों में हाथ आजमाना चाहते हैं या हैंग सेंग जैसे विदेशी सूचकांकों में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बाजार की बारीकियों को समझने का है। हैंग सेंग टेक इंडेक्स में हालिया हलचल यह सिखाती है कि तकनीकी शेयरों में जोखिम हमेशा ज्यादा होता है। शुरुआती निवेशकों को यह पता होना चाहिए कि अमेरिकी नीतियों, चीन के आर्थिक सुधारों और वैश्विक महंगाई का सीधा असर हांगकांग के इस इंडेक्स पर पड़ता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉंड यील्ड बढ़ती है, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ शेयरों से पैसा निकलकर सुरक्षित विकल्पों की तरफ जाने लगता है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार भी पूरी तरह से वैश्विक आंकड़ों और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के रुख पर चलेंगे। निवेशकों को किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए। एक्सपर्ट्स बार-बार यही कह रहे हैं कि बाजार में आंख मूंदकर पैसा लगाने का यह समय नहीं है। हर एक ट्रेड को बहुत नपेंगे-तुले तरीके से करने की जरूरत है, खासकर तब जब ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता अपने चरम पर हो।





