भारतीय शेयर बाजार और अमेरिकी वित्तीय बाजारों में इन दिनों आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिकी बाजार में कारोबार करने वाले भारतीय कंपनियों के एडीआर यानी अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। देश की दिग्गज आईटी कंपनियों जैसे इन्फोसिस और विप्रो के एडीआर में कभी तेजी तो कभी अचानक गिरावट आ रही है। बाजार के विश्लेषक इस पूरी स्थिति पर बारीक नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर अगले कारोबारी सत्र में घरेलू सूचकांकों पर पड़ता है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब वैश्विक स्तर पर आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी एक्सेंचर के शेयरों में एक दिन की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एक्सेंचर का स्टॉक लगभग उन्नीस प्रतिशत तक टूट गया, जिसका सीधा मनोवैज्ञानिक असर दूसरी आईटी कंपनियों पर भी पड़ा। इसके बाद निवेशकों ने सुरक्षित रुख अपनाना शुरू कर दिया। अमेरिका में लिस्टेड इन्फोसिस और विप्रो के एडीआर भी इस वैश्विक बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे और लाल निशान के साथ कारोबार करते दिखे।
वैश्विक बाजार का दबाव और घरेलू आईटी शेयरों की चाल
अमेरिकी बाजार से मिलने वाले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जानकारों का मानना है कि जब वैश्विक स्तर पर तकनीक क्षेत्र की कंपनियों का मुनाफा या उनके अनुमान कमजोर होते हैं, तो पूरी दुनिया के बाजारों में उसका असर दिखाई देता है। इन्फोसिस और विप्रो जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां अपनी कुल आय का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप के बाजारों से कमाती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी शेयर बाजार में होने वाली हलचल तुरंत इन कंपनियों के एडीआर में साफ नजर आती है।
दूसरी तरफ, हाल ही में इन्फोसिस ने अपने तिमाही नतीजे भी जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार कंपनी के मुनाफे में बारह प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई है और साथ ही नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की घोषणा भी की गई है। इसके बावजूद वैश्विक आईटी सेक्टर में छाई अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हो पा रहा है। बाजार विशेषज्ञ अनिल सिंघवी समेत कई दिग्गज निवेशकों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को बहुत सोच-समझकर ही किसी भी शेयर में पैसा लगाना चाहिए।
एचडीएफसी बैंक की नई नियुक्तियां और बाजार का रुख
एक तरफ जहां आईटी शेयरों में सुस्ती का माहौल है, वहीं दूसरी ओर बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में एचडीएफसी बैंक में नए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की खबर सामने आई है। इस खबर के बाद बैंकिंग शेयरों में कुछ हद तक स्थिरता और सकारात्मकता लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों का ध्यान अब केवल आईटी शेयरों पर ही नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी वाले बैंकिंग शेयरों पर भी टिक गया है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि निवेशकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उतार-चढ़ाव शेयर बाजार का एक स्वाभाविक हिस्सा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा बदलाव होता है, तो बाजार कुछ समय के लिए प्रतिक्रिया देता है। आने वाले दिनों में कंपनियों के नए ऑर्डर और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाल तय करेगी कि आईटी शेयरों का रुख किस दिशा में जाएगा। फिलहाल निवेशकों को हर छोटी खबर पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।









