नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है और अचानक मची इस तबाही से निवेशकों की सांसें थम गई हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1045 अंकों की भारी गिरावट के साथ 71,593 के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लुढ़ककर साल के निचले स्तर पर जा पहुंचा है। सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का जो दौर शुरू हुआ, वह दिनभर जारी रहा और देखते ही देखते निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के इस अचानक गिरे स्तर ने छोटे निवेशकों से लेकर बड़े कारोबारियों तक सबको चिंता में डाल दिया है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस भारी गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के कुछ कड़े फैसले और वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहे दबाव के कारण मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा भगदड़ मची। हालात यह हो गए कि निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाना ढूंढने के लिए ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू कर दी। हालांकि, इस कोहराम के बीच भी कुछ चुनिंदा शेयरों जैसे टाटा ग्रुप के कुछ काउंटर में अच्छी तेजी जरूर देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मिजाज पूरी तरह नकारात्मक बना रहा।
सेंसेक्स में भारी गिरावट की असली वजह क्या है?
बाजार में आई इस अचानक आंधी के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। जानकारों का कहना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के फैसलों के बाद से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, जिससे बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर सबसे बुरा असर पड़ा। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से भी बाजार की कमर टूट गई। जब बड़े निवेशक अपना पैसा बाहर निकालते हैं, तो घरेलू बाजार में घबराहट फैल जाती है और बिकवाली का दौर तेज हो जाता है।
दूसरी तरफ, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली देखी गई, जिससे छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंका और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी इस गिरावट के अहम कारण हैं। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी का असर भी सीधे तौर पर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि निवेशकों की संपत्ति में दर्जनों कंपनियों का मूल्यांकन एक झटके में कम हो गया।
टाटा ग्रुप के शेयरों में रही छप्परफाड़ तेजी
एक तरफ जहां पूरा बाजार खून के आंसू रो रहा था और चारों तरफ लाल निशान दिखाई दे रहा था, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा शेयरों ने निवेशकों को थोड़ी राहत भी दी। टाटा ग्रुप के एक शेयर में करीब 12.78 प्रतिशत की छप्परफाड़ तेजी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब भी बाजार गिरता है, मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों में लोग खरीदारी का मौका तलाशते हैं। यही वजह रही कि चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के कारण कुछ हद तक बड़े नुकसान की भरपाई हुई, लेकिन व्यापक बाजार की चाल को यह संभाल नहीं सका।
बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव आम निवेशकों के लिए हमेशा एक बड़ा सबक लेकर आते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह की भारी गिरावट के समय घबराकर अपने शेयर औने-पौने दाम पर न बेचें। लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वालों को हमेशा मजबूत कंपनियों के शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए। बाजार की यह मौजूदा चाल यह बताती है कि वैश्विक और घरेलू आर्थिक खबरों पर पैनी नजर रखना हर निवेशक के लिए बेहद जरूरी है।
अब आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल और क्या करें निवेशक?
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल और बाजार विशेषज्ञों से बातचीत के बाद यह साफ है कि आने वाले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी वित्तीय स्थिति को समझकर ही कोई नया कदम उठाएं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता नहीं आती और आरबीआई या सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तब तक संभलकर ट्रेड करना ही समझदारी होगी।
आम निवेशकों के लिए यह समय जोखिम भरे शेयरों से दूर रहने और सुरक्षित निवेश विकल्पों पर विचार करने का है। हर गिरावट के बाद बाजार में सुधार का दौर भी आता है, इसलिए धैर्य बनाए रखना ही इस समय सबसे बड़ा हथियार है। हमारे रिपोर्टर लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और बाजार की हर नई हलचल की सटीक जानकारी आप तक पहुंचाते रहेंगे ताकि आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रह सके।






