नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहे कूटनीतिक तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में अपने कनाडाई समकक्ष के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आपसी सुरक्षा चिंताओं और द्विपक्षीय मुद्दों पर खुलकर बात हुई है। भारत ने आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ कनाडा से सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है। इस बातचीत को दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली के रूप में देखा जा रहा है।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों का मिलना इस बात का संकेत है कि कड़वाहट को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में दोनों सरकारों के बीच बयानों की तल्खी कम हुई है। व्यापार और कूटनीति के मोर्चे पर भी बातचीत के रास्ते दोबारा खोले जा रहे हैं। भारत और कनाडा के बीच यह नई गतिशीलता दोनों देशों के प्रवासी नागरिकों के लिए भी राहत की खबर है। छात्रों और कामगारों को वीजा और यात्रा से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
सुरक्षा संबंधों को प्रगाढ़ बनाने और प्रत्यर्पण पर बड़ा फैसला
बैठक का सबसे बड़ा बिंदु सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना रहा है। भारत और कनाडा ने आतंकवाद और अपराधियों के प्रत्यर्पण के मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। कई भगोड़े अपराधी लंबे समय से कनाडा में छिपे हुए हैं जिन्हें भारत वापस लाना चाहता है। कनाडाई पक्ष ने इस दिशा में न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सहयोग करने का भरोसा दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। इससे दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
खेल के मैदान से भी दोनों देशों के बीच एक रोचक जुड़ाव सामने आया है। हाल ही में पंजाब के फरीदकोट के युवा खिलाड़ी नमन धीर को कनाडा की उड़ान भरने वाली टीम इंडिया के साथ सफर करने का मौका मिला। खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हमेशा से कूटनीति के मोर्चे पर बर्फ पिघलाने का काम करते रहे हैं। इस तरह की छोटी घटनाएं भी दोनों देशों के आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देती हैं। हालांकि, मुख्य फोकस अभी भी रणनीतिक और राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने पर ही बना हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलता समीकरण और अमेरिकी दखल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा की नीतियों पर सवाल उठाए हैं और अमेरिका को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। ऐसे समय में कनाडा के लिए भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक बाजार के साथ अपने संबंध सुधारना रणनीतिक रूप से जरूरी हो गया है। वैश्विक मंच पर देशों के बीच नए समीकरण बन रहे हैं और कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
जमीनी स्तर पर इसका असर आने वाले हफ्तों में और साफ दिखाई देगा। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं ताकि रुकी हुई परियोजनाओं और वार्ताओं को फिर से पटरी पर लाया जा सके। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन बातचीत के जरिए समाधान निकालने के रास्ते हमेशा खुले हैं। कनाडाई सरकार की तरफ से भी इस सकारात्मक रुख का स्वागत किया गया है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की राह
द फ्रीलान्स की टीम ने इस कूटनीतिक बदलाव का बारीकी से विश्लेषण किया है। जानकारों का कहना है कि यह शुरुआत बहुत अच्छी है, लेकिन रिश्तों को पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। दोनों सरकारों को जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि जनता और कारोबारियों का भरोसा पूरी तरह बहाल हो सके। सुरक्षा और प्रत्यर्पण के मामलों में वादों को जमीन पर उतारना ही इस रिश्ते की असली परीक्षा होगी।
आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं का दौर और तेज हो सकता है। आर्थिक समझौतों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरों पर भी चर्चा चल रही है। भारत और कनाडा के बीच का यह नया अध्याय यदि सफल रहता है तो यह दोनों देशों के साथ-साथ पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा।










