नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सोशल मीडिया की दुनिया में मचे बवाल और अंदरूनी सच्चाइयों को पर्दे पर उतारने वाले निर्देशक आरोन सॉर्किन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द सोशल रेकनिंग' अब रिलीज के बेहद करीब है और पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं। यह फिल्म ठीक नौ अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से फेसबुक की पूर्व कर्मचारी और व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन के उन साहसी खुलासों पर आधारित है, जिन्होंने पूरी दुनिया की टेक इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था।
साल 2021 में फ्रांसेस हौगेन ने अमेरिकी संसद के सामने पेश होकर फेसबुक और उसके मालिक मार्क जुकरबर्ग पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दस्तावेज देकर साबित किया था कि कंपनी अपने मुनाफे के लिए बच्चों की सुरक्षा और समाज की भलाई को ताक पर रख रही है। अब इसी सच्ची घटना और दस्तावेजों को निर्देशक आरोन सॉर्किन ने अपनी फिल्म की मुख्य कहानी बनाया है। समीक्षकों का मानना है कि यह फिल्म साल 2010 में आई मशहूर फिल्म 'द सोशल नेटवर्क' का ही एक नया और ज्यादा गंभीर रूप है, जिसमें तकनीकी दुनिया के काले सच को सामने लाया गया है।
मार्क जुकरबर्ग के किरदार और कंपनी पर उठे नए सवाल
फिल्म में मार्क जुकरबर्ग के किरदार को लेकर काफी चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई शुरुआती समीक्षाओं के मुताबिक, फिल्म में जुकरबर्ग के किरदार को एक ऐसे ताकतवर इंसान के रूप में दिखाया गया है जो अपनी डिजिटल दुनिया की कठपुतलियों को नचा रहा है। निर्देशक ने यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आम इंसानों की जिंदगी, उनके विचार और यहां तक कि लोकतंत्र को भी प्रभावित करने की ताकत रखता है। फिल्म में फेसबुक के कामकाज के उन तरीकों पर पर्दा उठाया गया है जो आम तौर पर पर्दे के पीछे छिपे रहते हैं और जिनके बारे में उपयोगकर्ताओं को कोई जानकारी नहीं होती है।
ब्रिटेन और अमेरिका के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने इस फिल्म की समीक्षा करते हुए इसे बहुत ही तेज रफ्तार और बेचैन कर देने वाली कहानी बताया है। हालांकि कुछ समीक्षकों का यह भी कहना है कि यह फिल्म पहले से तय धारणाओं को ज्यादा नहीं बदल पाएगी, लेकिन यह बहस छेड़ने में पूरी तरह कामयाब रही है। फिल्म में यह दिखाया गया है कि कैसे एक बड़ी तकनीक कंपनी अपने आलोचकों की आवाज दबाने की कोशिश करती है और किस तरह से अंदरूनी कर्मचारियों को चुप कराया जाता है। मार्क जुकरबर्ग के बेबाक और सख्त अंदाज को इस फिल्म में बहुत करीब से दिखाने का दावा किया गया है।
असली जिंदगी में अब कहां हैं व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन?
आम दर्शकों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि फेसबुक के खिलाफ आवाज उठाने वाली असली फ्रांसेस हौगेन आज कहां हैं और क्या कर रही हैं। व्यापार जगत की खबरों पर नजर रखने वाली वेबसाइट्स के अनुसार, हौगेन आज भी तकनीक कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने फेसबुक छोड़ने के बाद एक संगठन की शुरुआत की है जो सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ी नजर रखता है और सरकारों को कड़े कानून बनाने के लिए प्रेरित करता है। वह दुनिया भर के मंचों पर जाकर यह बताती हैं कि कैसे एल्गोरिदम नफरत और भ्रम फैलाते हैं।
हौगेन का जीवन आज भी तकनीकी पारदर्शिता की लड़ाई का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। जब 'द सोशल रेकनिंग' फिल्म रिलीज होने जा रही है, तो दुनिया भर में एक बार फिर से वही पुरानी बहस जिंदा हो गई है। लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई तकनीक कंपनियां किसी भी देश के कानून और नियमों से ऊपर हैं या फिर उन्हें लगाम कसने का कोई ठोस तरीका निकाला जाना चाहिए। इस फिल्म के आने से सोशल मीडिया दिग्गजों पर नैतिक दबाव और ज्यादा बढ़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिल्म बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के बीच कितनी असरदार होगी?
आरोन सॉर्किन के निर्देशन में बनी इस फिल्म से सिनेमा प्रेमियों को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। चूंकि उनकी पुरानी फिल्में संवाद और मजबूत पटकथा के लिए जानी जाती हैं, इसलिए इस फिल्म से भी एक बेहतरीन बौद्धिक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है। हालांकि देखना यह होगा कि आम दर्शक इस गंभीर और तकनीकी विषय को सिनेमाघरों में कितना पसंद करते हैं। क्या यह फिल्म केवल कागजी बहसों तक सीमित रह जाएगी या सचमुच लोगों की सोच में कोई बदलाव लाएगी, इसका फैसला तो फिल्म रिलीज होने के बाद आने वाले बॉक्स ऑफिस आंकड़े और दर्शकों की प्रतिक्रिया ही तय करेंगी।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ है कि 'द सोशल रेकनिंग' सिर्फ एक मनोरंजन फिल्म नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और इंसानी स्वतंत्रता के बीच चल रही एक बड़ी लड़ाई का आईना है। नौ अक्टूबर को जब यह फिल्म पर्दे पर आएगी, तो टेक जगत के दिग्गजों की सांसे जरूर थोड़ी बढ़ेंगी। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी और उनके काम करने के तौर-तरीकों पर एक बार फिर से पूरी दुनिया में बहस छिड़ना तय माना जा रहा है, और हमारी टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी।






