लखनऊ/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय बड़े बदलाव और नए सियासी समीकरण बनते दिख रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों बेहद सक्रिय मोड में नजर आ रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर राजधानी लखनऊ तक पार्टी में नेताओं के शामिल होने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी अपनी जमीन को और मजबूत करने के लिए हर संभव दांव चल रही है। जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश दिखाई दे रहा है और पार्टी के नेता लगातार जनता के बीच बने हुए हैं।
चुनावी माहौल के बीच अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि एसआरआर का उल्टा आरएसएस और फिर एसआईआर जैसी बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी तकनीकी प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे चल रही राजनीतिक साजिशों का विरोध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी का दावा है कि लोकतंत्र की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए ताकि जनता का भरोसा कायम रहे।
पश्चिमी यूपी में बंपर जॉइनिंग और बढ़ते सियासी समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका हमेशा से उत्तर प्रदेश की सियासत में सत्ता का रास्ता तय करने वाला मुख्य केंद्र रहा है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी का पूरा फोकस इस क्षेत्र पर बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी यूपी से कई स्थानीय नेता और प्रभावी चेहरे समाजवादी पार्टी का दामन थाम चुके हैं। पार्टी कार्यालय में लगातार हो रहे इन आयोजनों से साफ है कि विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी खेमा पूरी ताकत झोंक रहा है। हाल ही में सत्तारूढ़ दल के कुछ स्थानीय पार्षदों और नेताओं के समाजवादी पार्टी के संपर्क में आने की चर्चाओं ने भी राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के दायरे को बढ़ाने की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने हाल ही में दिए अपने बयानों में संकेत दिए हैं कि कुछ नए राजनीतिक दल उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन के साथ जुड़ने के लिए बातचीत कर रहे हैं। हालांकि अभी सीटों के बंटवारे और आपसी तालमेल को लेकर मोलभाव का दौर चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छोटे दल साथ आते हैं, तो जमीनी स्तर पर समीकरण काफी बदल सकते हैं। समाजवादी पार्टी इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती है और सभी जातियों व वर्गों को साधकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर तीखा वार
राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। प्रयागराज में हाल ही में हुई एक अधिवक्ता की हत्या के मामले को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि नारी के श्राप से कोई नहीं बच सकता और प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। आम जनता के बीच भी इन घटनाओं को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और लोग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
इन तमाम हमलों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी भी पूरी ताकत से पलटवार कर रही है। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की किसान विरोधी सोच से हर कोई पूरी तरह वाकिफ है। भाजपा का दावा है कि डबल इंजन सरकार ने किसानों और आम जनता के हित में ऐतिहासिक काम किए हैं, जबकि विपक्षी दल केवल बयानबाजी कर रहे हैं। राज्य में अगले चुनावों का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बयानों के तीर और तीखे होते जा रहे हैं। जनता इन सभी राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
भविष्य की रणनीति और द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल
हमारी ग्राउंड पड़ताल बताती है कि उत्तर प्रदेश का मतदाता इस बार बहुत ही सूझबूझ के साथ हर गतिविधि को देख रहा है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लगातार नए सहयोगियों को जोड़ने में जुटी है, वहीं सत्ताधारी दल विकास और कानून व्यवस्था के दम पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के दौरे और रैलियां और अधिक तेज होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल भी इस चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना रहे हैं।







