लखनऊ/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक के बाद एक तीखे बयानों ने सरगर्मी बढ़ा दी है। पिछले कुछ घंटों से गूगल ट्रेंड्स पर सबसे आगे चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से लेकर राज्य के कानून-व्यवस्था के मुद्दे केंद्र में आ गए हैं। अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ही शख्स के नाम पर दस-दस वोट दर्ज हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि पहले एसआरआर का उल्टा आरएसएस और फिर एसआईआर जैसी चर्चाओं के बीच चुनाव निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
सपा प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि वे किसी तकनीकी शब्दावली या प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके नाम पर चल रही कथित राजनीतिक साजिशों का विरोध कर रहे हैं। इस बीच धरातल पर राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में सत्ताधारी दल के एक स्थानीय नेता के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर सामने आने के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी तरफ, बहुचर्चित प्रयागराज अधिवक्ता हत्याकांड को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है.
इंडिया गठबंधन में नए दलों के शामिल होने के संकेत
विपक्ष के भीतर की रणनीति पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश में 'इंडिया' गठबंधन का दायरा और बढ़ सकता है। कुछ नए दल गठबंधन में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं और सीटों व समीकरणों को लेकर मोलभाव चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आगामी चुनावों से पहले छोटे दल सपा के साथ आते हैं, तो राज्य का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। सपा सुप्रीमो की यह रणनीति भाजपा के खिलाफ एक मजबूत और साझा मोर्चा तैयार करने की दिशा में अगला बड़ा कदम मानी जा रही है।
हालांकि, सत्ता पक्ष ने भी इन बयानों और रणनीतियों पर कड़ा पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सपा की किसान विरोधी और जनविरोधी सोच से हर कोई वाकिफ है। भाजपा का दावा है कि जनता इन बयानों के पीछे छिपी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भली-भांति समझती है और प्रदेश की जनता विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल बयानबाजी के सहारे चर्चा में बने रहना चाहते हैं।
प्रयागराज हत्याकांड और कानून व्यवस्था पर तीखी बहस
राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर एक बार फिर से सियासत गरमा गई है। प्रयागराज में एक अधिवक्ता की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा और तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने लिखा कि नारी के श्राप और अन्याय से कोई नहीं बच सकता, जिससे साफ जाहिर होता है कि विपक्ष इस संवेदनशील मामले को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच आम जनता औरकी नाराजगी भी अब खुलकर सामने आने लगी है।
जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि एक तरफ जहां प्रशासनिक अमला वोटर लिस्ट के सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इन दावों की पोल खोलने में जुटे हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी चौराहों तक इन दिनों बस इसी बात की चर्चा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दल क्या नया दांव चलेंगे। चुनाव आयोग के फैसलों से लेकर क्षेत्रीय दलों की जोड़-तोड़ तक, उत्तर प्रदेश का यह राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले हफ्तों में और अधिक तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
जमीनी समीकरण और राजनीतिक दलों की आगामी रणनीति
इन तमाम गर्माती राजनीतिक बहसों के बीच ग्राउंड पर उतरी हमारी टीम ने पाया कि आम मतदाता अभी पूरे घटनाक्रम को बहुत बारीकी से देख रहा है। चाहे फर्जी वोटर लिस्ट का मुद्दा हो या फिर छोटे दलों के साथ गठबंधन की सुगबुगाहट, हर बात पर जनता की अपनी अलग प्रतिक्रिया है। एक तरफ जहां सपा कार्यकर्ता अपने नेता के बयानों को सही ठहराते हुए प्रशासनिक चूक मान रहे हैं, वहीं विरोधी खेमा इसे महज राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है और राज्य का राजनीतिक ऊँट किस करवट बैठता है।





