नई दिल्ली/देहरादून — उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मृतका के पिता वीरेंद्र भंडारी ने न्याय की मांग को लेकर पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। इस मामले में लगातार उठ रही आवाज़ों के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ गई है और आरोपियों को कड़े दंड देने की मांग जोर पकड़ रही है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस पूरे मामले में कई बड़े और रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार ने अपनी पांच मुख्य मांगों में वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और मामले की निष्पक्ष जांच की बात दोहराई है। परिवार का कहना है कि जब तक मुख्य दोषियों को पूरी तरह सजा नहीं मिलती और इस साजिश में शामिल अन्य चेहरे बेनकाब नहीं होते, तब तक उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी। परिवार के इस संघर्ष में अब कई सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल भी खुलकर सामने आने लगे हैं.
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति और हिरासत का विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उस समय और तनाव बढ़ गया जब दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने की चर्चा पर विरोध शुरू हुआ। अंकिता के माता-पिता और प्रदर्शनकारियों ने इस नियुक्ति का कड़ा विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंकिता के माता-पिता को कुछ समय के लिए हिरासत में भी ले लिया, जिसे लेकर बाद में भारी नाराजगी देखने को मिली। हालांकि, बढ़ते दबाव के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान हिंदुत्ववादी संगठनों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और मारपीट के आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस हालात को काबू में करने के लिए लगातार मुस्तैद नजर आई। देश की राजधानी में अंकिता के न्याय के लिए उठे इन स्वरों ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान इस दर्दनाक घटना की ओर खींच लिया है। लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी नाराजगी जता रहे हैं और उत्तराखंड सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील कर रहे हैं।
राहुल और प्रियंका गांधी का कड़ा संदेश
पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की यह लड़ाई न तो कभी दबेगी और न ही रुकेगी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मामलों में प्रशासनिक रवैया बेहद लचर है, जिसे बदलने की सख्त जरूरत है। प्रियंका गांधी ने भी परिवार की हिम्मत की सराहना करते हुए उनकी हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि आम जनता और स्थानीय लोग इस हत्याकांड को भूले नहीं हैं। न्याय में हो रही देरी को लेकर लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि लोग अब केवल बयानों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं, बल्कि वे अदालत और सरकार से ठोस परिणाम चाहते हैं। अंकिता के माता-पिता की ये पांच मांगें अब इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बन चुकी हैं, और आने वाले दिनों में यह मामला देश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
न्याय की मांग और आगे की कानूनी राह
इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच शुरू से ही जनता के निशाने पर रही है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सभी सबूतों को सुरक्षित रखकर त्वरित कार्रवाई की जाती, तो आज पीड़ित परिवार को सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार की पांच मांगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं और अदालत में अभियोजन पक्ष को इन बिंदुओं को मजबूती से रखना चाहिए ताकि दोषियों को किसी भी प्रकार की कानूनी राहत न मिल सके।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में यह देखना बेहद अहम होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां अंकिता के परिवार की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं। देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई उस तथाकथित वीआईपी का नाम सामने आ पाएगा जिसके इशारे पर यह सब हुआ था या यह फाइल यूं ही फाइलों के बंडल में दबकर रह जाएगी।







