उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर देश की सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में मृतका के पिता वीरेंद्र भंडारी ने अपनी पांच सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी हैं। पिता ने साफ कह दिया है कि अगर उनकी बेटियों और परिवार को समय पर पूरा इंसाफ नहीं मिला, तो पूरा उत्तराखंड सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा। इस गंभीर मामले ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुस्ती पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने इस मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों से सीधी बातचीत की है।
घटना के इतने महीने बीत जाने के बाद भी वीआईपी और अन्य मुख्य बिंदुओं पर से पर्दा पूरी तरह नहीं उठ पाया है। हाल ही में अंकिता के माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना ने भी जनता के बीच भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद से जनता का आक्रोश और अधिक भड़क गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में असली चेहरों को बचाने की कोशिश लगातार की जा रही है। पिता वीरेंद्र भंडारी ने चेतावनी दी है कि यदि सिक्किम राज्यपाल की नियुक्ति या अन्य संबंधित मामलों में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में फैल जाएगा।
माता-पिता की पांच बड़ी मांगें और वीआईपी का मुद्दा
अंकिता के परिवार ने जो पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, उनमें उस रहस्यमयी वीआईपी का नाम सार्वजनिक करना सबसे ऊपर है जिसका जिक्र अंकिता की चैट और ऑडियो में आया था। परिवार का कहना है कि पुलिस और प्रशासन शुरू से ही उस वीआईपी को बचाने की जुगत में लगे हैं। इसके अलावा, मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा देने की मांग भी शामिल है। माता-पिता ने सिक्किम राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है और कहा है कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं आती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इस हत्याकांड के तार बहुत दूर तक जुड़े हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर भी सियासत गरमाने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने अंकिता के परिवार का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर तीखा बयान जारी किया है। राहुल गांधी ने कहा है कि अंकिता के लिए न्याय की यह लड़ाई न तो कभी दबेगी और न ही रुकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपराधियों को संरक्षण देने का काम कर रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय उन्हें प्रताड़ित कर रही है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी दल सरकार पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
पुलिस हिरासत की घटना और जनता का बढ़ता आक्रोश
कुछ दिन पहले जब अंकिता के माता-पिता अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तब स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इस कार्रवाई की पूरे देश में कड़ी निंदा हुई थी। हालांकि बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने उन्हें तुरंत छोड़ दिया, लेकिन इस एक कदम ने जनता के जख्मों को फिर से हरा कर दिया। आम जनता का कहना है कि एक तरफ बेटी गंवा चुके माता-पिता न्याय की भीख मांग रहे हैं और दूसरी तरफ पुलिस उन्हें ही गिरफ्तार कर रही है। यह रवैया पूरी तरह से अमानवीय और संवेदनहीन है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद लोगों का मूड साफ बता रहा है कि इस बार जनता चुप बैठने वाली नहीं है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानों तक हर जगह इस मामले को लेकर गहरी नाराजगी है। लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। महिलाओं और युवाओं में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा है कि एक बेटी के साथ इतना बड़ा अन्याय हुआ और अब तक मुख्य दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है। प्रशासन और सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे जनता का गुस्सा शांत करने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं, वरना यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है।
आगे की राह और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
पिता वीरेंद्र भंडारी ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि उनका संघर्ष अब रुकने वाला नहीं है। अगर सरकार ने उनकी पांचों मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो वे इस लड़ाई को गांव-गांव और शहर-शहर तक लेकर जाएंगे। देशभर के सामाजिक संगठन और न्याय के लिए लड़ने वाले लोग अब इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं। अंकिता भंडारी का यह मामला अब केवल एक परिवार का दर्द नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की बेटियों की सुरक्षा और न्याय की एक बड़ी लड़ाई बन चुका है। द फ्रीलान्स इस मामले की हर एक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी सच्चाई जनता के सामने लाता रहेगा।







