नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तराखंड की चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन पीड़ित माता-पिता का दर्द और न्याय की आस अब भी वैसी ही है। इसी कड़ी में अंकिता के माता-पिता ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रुख किया है और इंसाफ की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। इस गंभीर मामले ने एक बार फिर देश की सियासत और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बेटी को खोने का गम और प्रशासन की सुस्त चाल से परेशान परिवार अब खुलकर अपनी बात देश के सामने रख रहा है।
धरने की खबर मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी सीधे वहां पहुंचे और पीड़ित माता-पिता से लंबी मुलाकात की। राहुल गांधी ने परिवार का दर्द सुना और उन्हें ढांढस बंधाया कि इस मुश्किल वक्त में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। परिवार का आरोप है कि मामले के असली दोषियों और कथित वीवीआईपी चेहरों को अब तक बचाया जा रहा है। माता-पिता ने साफ कहा है कि जब तक उनकी बेटी को पूरा इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और धरना यूं ही जारी रहेगा।
उत्तराखंड की बेटी के लिए दिल्ली में क्यों बैठा परिवार?
अंकिता भंडारी का मामला सिर्फ एक राज्य या एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश भर की बेटियों की सुरक्षा का बड़ा सवाल बन गया है। उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता की हत्या के बाद से ही लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कई बार प्रदर्शन हुए, लेकिन परिवार का मानना है कि उन्हें अब तक वह न्याय नहीं मिला जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में धरने-प्रदर्शनों का पुराना इतिहास रहा है, और अब इसी कड़ी में उत्तराखंड का यह पीड़ित परिवार भी अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचा है।
राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का भी अब इस धरने को लेकर समर्थन मिलना शुरू हो गया है। राहुल गांधी के दौरे के बाद इस मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य सरकार इस मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और पुलिस अपनी शुरुआती कार्रवाई का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की बात कह रही है, लेकिन पीड़ित परिवार इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है।
न्याय की आस में भटकते माता-पिता की मुख्य मांगें
पीड़ित माता-पिता का साफ कहना है कि इस पूरी घटना में कई बड़े नाम शामिल हैं जिन्हें जानबूझकर बचाया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई थी ताकि असली गुनाहगार कभी कानून के शिकंजे में न आ सकें। परिवार की मुख्य मांग है कि मामले की सीबीआई से दोबारा गहराई से जांच हो और जितने भी लोग इस कृत्य में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से शामिल थे, उन्हें फांसी की सजा दी जाए। देश भर से लोग सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर इस परिवार का समर्थन कर रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब धरना स्थल पर जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो वहां मौजूद लोगों में भारी गुस्सा और निराशा देखने को मिली। आम जनता का मानना है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया को लेकर अभी बहुत कुछ बदला जाना बाकी है। अंकिता के माता-पिता का यह धरना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि एक आम परिवार कितनी लंबी और कठिन लड़ाई लड़ने को मजबूर है। आने वाले दिनों में यह मामला देश की राजनीति में और ज्यादा गरमा सकता है, क्योंकि राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।
आगे क्या होगा और प्रशासन का रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस नए दबाव के बाद क्या कदम उठाते हैं। क्या पीड़ित परिवार की मांगों को मानते हुए मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाएंगे या फिर यह धरना ऐसे ही लंबा खिंचता चला जाएगा? द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी। सच को सामने लाने और अंकिता के माता-पिता को उनका हक दिलाने के लिए हमारी यह जमीनी पड़ताल लगातार जारी रहेगी।






