नई दिल्ली। देश की राजधानी में सियासी पारा अचानक बहुत बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। बीजेपी ने साफ शब्दों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में भीड़तंत्र कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेता देश की सर्वोच्च अदालत पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ताओं ने मीडिया के सामने राहुल गांधी को अराजकता का प्रतीक बताया है।
बीजेपी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि देश कानून और संविधान से चलता है। अदालतों के फैसलों का सम्मान हर नागरिक और दल को करना चाहिए। लेकिन विपक्ष अपनी सुविधा के अनुसार अदालतों के रुख पर टिप्पणी करता है। जब फैसला पक्ष में नहीं आता, तो संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं। बीजेपी ने कहा कि अदालत परिसर को विरोध प्रदर्शन का अखाड़ा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
बीजेपी के वार: संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का आरोप
बीजेपी नेताओं ने कहा कि देश की न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष है। वहां मुकदमों की सुनवाई तथ्यों, सबूतों और कानून की धाराओं के आधार पर होती है। किसी भी राजनीतिक दल को वहां शक्ति प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सत्ता पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर चोट कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इस तरह की राजनीति से लोकतंत्र मजबूत नहीं बल्कि कमजोर होता है।
बीजेपी ने यह भी कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। पार्टी जब भी सत्ता से बाहर होती है, वह हर निष्पक्ष संस्था पर अविश्वास जताने लगती है। कभी चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जाते हैं, तो कभी अदालतों की प्रक्रिया पर संदेह जताया जाता है। बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी जनता का भरोसा खो चुके हैं। इसी हताशा में वह और उनके समर्थक अराजक माहौल तैयार करने की कोशिश में लगे हैं।
अदालत के बाहर क्यों गरमाई देश की सियासत?
राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ समय से कई कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर टकराव बना हुआ है। विपक्षी दल लगातार चुनाव प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नए नियमों पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर और आसपास भारी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता जमा हुए थे। इसी घटनाक्रम को लेकर बीजेपी ने कड़ा ऐतराज दर्ज कराया है। बीजेपी का कहना है कि अदालत के संवेदनशील दायरे में इस तरह का जमावड़ा न्यायिक गरिमा के खिलाफ है।
वरिष्ठ वकीलों और कानूनविदों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि अदालत के परिसर को हमेशा राजनीतिक गहमागहमी से दूर रखा जाना चाहिए। वहां वकीलों, जजों और आम वादियों को शांत वातावरण मिलना बेहद जरूरी है। राजनीतिक नारों और भीड़ के कारण न्यायिक कामकाज पर बुरा असर पड़ता है। इसी बात को रेखांकित करते हुए बीजेपी ने राहुल गांधी की रणनीति को कटघरे में खड़ा किया है।
विपक्ष की सफाई: लोकतंत्र बचाने की आवाज नहीं दबेगी
उधर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने बीजेपी के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि वे न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं। विपक्ष का कहना है कि वे केवल जनता के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार हर विरोधी आवाज को अराजकता कहकर दबाना चाहती है। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताना संविधान में दिया गया मौलिक अधिकार है।
कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। देश में महंगाई, बेरोजगारी और चुनावी पारदर्शिता जैसे बड़े सवाल मौजूद हैं। विपक्ष इन सवालों को लगातार संसद और सड़क पर उठा रहा है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए राहुल गांधी को निशाना बना रही है। वे संविधान और लोकतंत्र की हिफाजत के लिए अपनी लड़ाई बिना किसी डर के जारी रखेंगे।
संविधान, सुरक्षा और राजधानी का मौजूदा माहौल
इस पूरे सियासी घमासान के बीच दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवेदनशील सरकारी इमारतों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली क्षेत्र में बिना अनुमति के किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। किसी को भी शांति व्यवस्था भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और गहरा सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे पर संवैधानिक मर्यादाएं तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। दोनों खेमों की यह तनातनी अब केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालत की चौखट तक पहुंच चुकी है। जनता इस पूरे विवाद को बहुत करीब से देख रही है, जहां एक तरफ मर्यादा का सवाल है और दूसरी तरफ राजनीतिक अस्तित्व की जंग है।






