पटना/राघोपुर ग्राउंड ब्यूरो — बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपनी ही सहयोगी एनडीए सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। मामला राज्य के राघोपुर इलाके में हाल ही में हुए दर्दनाक नाव हादसे से जुड़ा है, जिसमें कई बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। चिराग पासवान ने इस हादसे के पीछे प्रशासनिक लापरवाही को मुख्य कारण बताया है और सरकार से कड़े जवाब मांगे हैं।
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और पीड़ितों का दर्द अब खुलकर सामने आने लगा है। हादसे में तेरह लोगों की जान गंवाने से दुखी एक स्थानीय किसान ने सीधा सवाल उठाया है कि अगर नेता पांच लाख नौकरियों का क्रेडिट ले सकते हैं, तो ऐसी त्रासदियों में जिम्मेदारी से पल्ला क्यों झाड़ा जाता है। राघोपुर नाव हादसे के बाद से ही इलाके के लोगों में जिला प्रशासन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी पार करने के लिए कोई पुख्ता और सुरक्षित इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ।
राघोपुर नाव हादसे पर सियासत तेज, लापरवाही के लगे गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर जब हमने जमीनी स्तर पर पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती इस हादसे की बड़ी वजह थी। चिराग पासवान का एनडीए सरकार के भीतर से ही इस तरह खुलकर सवाल उठाना यह साफ करता है कि जमीन पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुट गए हैं। लेकिन जब सत्ता पक्ष के ही एक प्रमुख घटक दल के नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, तो इससे प्रशासनिक महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
दूसरी तरफ, बिहार की राजनीति में बयानों के तीर भी लगातार चल रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान पर कांग्रेस पार्टी के नेता असित नाथ तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सम्राट चौधरी ने कहा था कि प्रभु श्रीराम भी इस बात का इंतजार कर रहे थे कि मोदी जी उन्हें घर कब देंगे। इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक पारा और चढ़ गया है, और धार्मिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ जहां सरकार विकास और कल्याणकारी योजनाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राघोपुर हादसे जैसे मुद्दे उसकी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
रेत खनन के नए फरमान और राजनीतिक बयानबाजी का दौर
इन तमाम राजनीतिक उठापटक के बीच बिहार सरकार के खनन विभाग ने एक नया फरमान जारी किया है, जिसके तहत राज्य में जल्द ही रेत खनन शुरू होने की बात कही जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे बाजार में बालू की किल्लत दूर होगी और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। हालांकि, आम जनता का ध्यान इस समय पूरी तरह से राघोपुर हादसे और उस पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर ही केंद्रित है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में बयानों के पुराने और नए दौर की तुलना भी खूब हो रही है। लोग पुराने दिनों को याद करते हुए कह रहे हैं कि राजनीति करने के तौर-तरीके अब पूरी तरह बदल चुके हैं। बहरहाल, चिराग पासवान द्वारा उठाए गए 'लापरवाही कनेक्शन' ने एनडीए सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।







