कोलेस्ट्रॉल की समस्या आज के समय में घर-घर की कहानी बन चुकी है। गलत खानपान और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण लोग तेजी से इसका शिकार हो रहे हैं। शरीर में गंदा कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर दिल की बीमारियों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस खतरे को टालने के लिए डॉक्टर अक्सर मरीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाइयां लिखते हैं। लेकिन इन दवाइयों को लेकर लोगों के मन में हमेशा से कई तरह के डर और सवाल रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह पूछा जाता है कि क्या लगातार ये गोलियां खाने से लिवर खराब हो जाता है।
इस गंभीर विषय पर जाने-माने cardiologist डॉक्टर अनिल कुमार आर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके अनुसार कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाइयां पूरी तरह सुरक्षित हैं बशर्ते उन्हें डॉक्टर की सलाह पर लिया जाए। लोग अक्सर बिना सोचे-समझे डर जाते हैं कि अंग्रेजी दवाइयां उनके शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा रही हैं। डॉक्टर का कहना है कि लिवर पर असर पड़ने की आशंका बहुत ही कम मामलों में होती है। इसके लिए डॉक्टर समय-समय पर खून की जांच कराने की सलाह देते हैं ताकि लिवर की स्थिति का पता चल सके।
लिवर की सेहत और कोलेस्ट्रॉल की दवाइयों का सच
जब मरीज पहली बार कोलेस्ट्रॉल की दवा शुरू करते हैं तो डॉक्टर उनके लिवर फंक्शन की जांच करते हैं। यह जांच यह देखने के लिए होती है कि मरीज का शरीर दवा को कैसे अपना रहा है। कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि दवाइयों से लिवर के एंजाइम थोड़े बढ़ सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लिवर को कोई स्थायी नुकसान पहुंच रहा है। दवा बंद करने या डॉक्टर के निर्देशानुसार खुराक बदलने से यह स्थिति ठीक हो जाती है। इसलिए मरीजों को बिना डरे अपनी दवा समय पर लेनी चाहिए।
खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके भी कोलेस्ट्रॉल को काबू में रखा जा सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कुछ खास चीजों से परहेज करना बहुत जरूरी होता है। जंक फूड, तली हुई चीजें और मैदे से बनी चीजें कोलेस्ट्रॉल को और बढ़ा देती हैं। इसके अलावा लोग अपनी रसोई में खाना पकाने के तरीकों पर भी ध्यान दे रहे हैं। एयर फ्रायर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल आजकल तेजी से बढ़ रहा है। क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट बताती है कि एयर फ्रायर में कम तेल का इस्तेमाल होता है जो दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
खानपान में बदलाव और घरेलू नुस्खों का असर
केरल और दक्षिण भारत के खानपान में हाल ही में बादाम पुट्टू जैसी रेसिपी काफी चर्चा में रही हैं। ओमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार बादाम और सेहतमंद अनाजों से बनने वाली ये चीजें पारंपरिक स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखती हैं। लोग अब समझ रहे हैं कि वजन और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने के लिए स्वाद के साथ सेहत का तालमेल बिठाना जरूरी है। बादाम और मेवे खाने से शरीर को अच्छे फैट मिलते हैं जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत को लेकर लगातार नए शोध सामने आ रहे हैं। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपे एक अध्ययन के अनुसार रोसुवास्टेटिन जैसी दवाइयां दिल के दौरों को रोकने में बेहद असरदार साबित हुई हैं। जिन लोगों के शरीर में सूजन या सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर अधिक होता है, उन्हें ये दवाइयां बहुत फायदा पहुंचाती हैं। विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा ने मिलकर दिल की बीमारियों से लड़ने के रास्ते आसान कर दिए हैं।
दवाओं के साथ डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि लोग अक्सर आधे-अधूरे ज्ञान के आधार पर दवाइयां छोड़ देते हैं। इंटरनेट पर बिना किसी पुख्ता जानकारी के डर पैदा कर देने वाली बातें पढ़कर लोग घबरा जाते हैं। डॉक्टरों का साफ कहना है कि खुद से डॉक्टर बनना और अपनी मर्जी से दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर बिना किसी लक्षण के चुपचाप दिल पर हमला कर सकता है। इसलिए समय पर जांच कराना और डॉक्टर के बताए नियमों का पालन करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।





