विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/देश/दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की मांग पर दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस
देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की मांग पर दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली भारतीय युवा कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। यह मामला जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करने और राजनीतिक दलों द्वारा रैलियों व धरनों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। अदालत अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब लेगी।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•15 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•50
🌐Read in English →
शेयर करें:
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की मांग पर दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस
📷 दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की मांग पर दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली भारतीय युवा कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। यह मामला जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करने और राजनीतिक दलों द्वारा रैलियों व धरनों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। अदालत अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब लेगी।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और अदालतों में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों के हक को लेकर बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांग रही भारतीय युवा कांग्रेस की याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। युवा कांग्रेस का यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और हालिया चुनावी फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने की योजना का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर पहले ही खारिज कर दिया था।

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में वह प्रशासनिक आदेश है जिसके तहत ऐतिहासिक जंतर-मंतर क्षेत्र को विरोध-प्रदर्शन और धरने की अधिकृत जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर राजनीतिक दल और संगठन का मौलिक अधिकार है। पुलिस द्वारा लगातार प्रदर्शनों की इजाजत न दिए जाने से लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि वीवीआईपी इलाकों और संवेदनशील ठिकानों के पास लगातार धरने-प्रदर्शन होने से आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम और सुरक्षा संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई करने के फैसले पर कानूनी सवाल

राजधानी में प्रदर्शन स्थलों की कमी और पुलिस की सख्ती का यह मुद्दा अब सीधे तौर पर अदालत के पाले में पहुंच गया है। जंतर-मंतर लंबे समय से देश भर के आंदोलनों, राजनीतिक प्रदर्शनों और धरना स्थलों का मुख्य केंद्र रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में सुरक्षा कारणों और स्थानीय निवासियों की शिकायतों का हवाला देते हुए यहां प्रदर्शनों पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध की जगहों को इस तरह से खत्म किया जाएगा, तो आम नागरिकों और राजनीतिक दलों के पास अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का कौन सा लोकतांत्रिक जरिया बचेगा।

इसी कड़ी में यूथ कांग्रेस के नेताओं ने जोर देकर कहा है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों के कामकाज पर सवाल उठाना या उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराजगी जताना विपक्ष का हक है। पुलिस प्रशासन द्वारा हर बार अनुमति देने से इनकार करना प्रशासनिक तानाशाही जैसा प्रतीत होता है। अदालत के इस नोटिस के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दिल्ली पुलिस प्रशासन अपनी सफाई में उच्च न्यायालय के सामने क्या नए तर्क रखती है और कौन से सुरक्षा संबंधी दस्तावेज पेश करती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस की पाबंदियां

देश की राजधानी दिल्ली में हाल के महीनों में विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और हिरासत की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले दिनों राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिससे सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक सियासत गर्मा गई थी। विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन लोकतांत्रिक विरोध की हर आवाज को कुचलने की कोशिश कर रहा है।

मैदान पर तैनात हमारे संवाददाताओं के मुताबिक, दिल्ली पुलिस इस मामले में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है क्योंकि शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि, उच्च न्यायालय की इस दखलंदाजी के बाद पुलिस अधिकारियों को अब अदालत के सामने अपने हर कदम का कानूनी और तथ्यात्मक हिसाब देना होगा। याचिका पर अगली सुनवाई से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बैठकों का दौर तेज हो गया है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अदालत प्रदर्शनकारियों को कोई राहत देती है या नहीं।

अगली सुनवाई और अदालत का संभावित रुख

द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ एक याचिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शन के अधिकारों की सीमाओं पर एक बड़ी बहस को जन्म देगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह नोटिस प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि लोकतांत्रिक अधिकारों को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। अब सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस के उस आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं जो उसे अदालत के समक्ष दाखिल करना है।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन महीने में मतदान कराने का सख्त आदेश; पद पर बने रहेंगे प्रधान

यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन महीने में मतदान कराने का सख्त आदेश; पद पर बने रहेंगे प्रधान

दिल्ली में मतदाता सूची से 47 लाख नाम कटने पर सियासी संग्राम, INDIA ब्लॉक का बड़ा चुनावी दांव

दिल्ली में मतदाता सूची से 47 लाख नाम कटने पर सियासी संग्राम, INDIA ब्लॉक का बड़ा चुनावी दांव

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे व्यापारी: दिल्ली में प्रदर्शन के चलते खान मार्केट से कनॉट प्लेस तक कारोबार ठप

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे व्यापारी: दिल्ली में प्रदर्शन के चलते खान मार्केट से कनॉट प्लेस तक कारोबार ठप

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को किया डिटेन?, कहा- "मुझे फांसी दे दो"?

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को किया डिटेन?, कहा- "मुझे फांसी दे दो"?

तिरंगा मार्च से पहले संग्राम: दिल्ली पुलिस से भिड़े अभिजीत दीपके, हिरासत में लिए जाने पर तीखी बहस

तिरंगा मार्च से पहले संग्राम: दिल्ली पुलिस से भिड़े अभिजीत दीपके, हिरासत में लिए जाने पर तीखी बहस

CJP नेता अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोहरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

CJP नेता अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोहरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘up-panchayat-elections’ व देश से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेशNATIONAL

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश

15 अक्टू॰51
उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेशNATIONAL

उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

15 अक्टू॰36
यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन महीने में मतदान कराने का सख्त आदेश; पद पर बने रहेंगे प्रधानNATIONAL

यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन महीने में मतदान कराने का सख्त आदेश; पद पर बने रहेंगे प्रधान

15 अक्टू॰38
दिल्ली में मतदाता सूची से 47 लाख नाम कटने पर सियासी संग्राम, INDIA ब्लॉक का बड़ा चुनावी दांवNATIONAL

दिल्ली में मतदाता सूची से 47 लाख नाम कटने पर सियासी संग्राम, INDIA ब्लॉक का बड़ा चुनावी दांव

16 अक्टू॰34
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे व्यापारी: दिल्ली में प्रदर्शन के चलते खान मार्केट से कनॉट प्लेस तक कारोबार ठपNATIONAL

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे व्यापारी: दिल्ली में प्रदर्शन के चलते खान मार्केट से कनॉट प्लेस तक कारोबार ठप

16 अक्टू॰34
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को किया डिटेन?, कहा- "मुझे फांसी दे दो"?NATIONAL

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को किया डिटेन?, कहा- "मुझे फांसी दे दो"?

16 अक्टू॰36
तिरंगा मार्च से पहले संग्राम: दिल्ली पुलिस से भिड़े अभिजीत दीपके, हिरासत में लिए जाने पर तीखी बहसNATIONAL

तिरंगा मार्च से पहले संग्राम: दिल्ली पुलिस से भिड़े अभिजीत दीपके, हिरासत में लिए जाने पर तीखी बहस

16 अक्टू॰45
CJP नेता अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोहरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लियाNATIONAL

CJP नेता अभिजीत दीपके और AISA प्रमुख नेहा बोहरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

16 अक्टू॰27
विज्ञापन • ADVERTISEMENT