नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सोशल मीडिया पर अपने तीखे राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषणों के लिए पहचाने जाने वाले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने देश की चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर अपने विचार रखे। राठी ने दो टूक शब्दों में कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है और यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव आयोग में सुधार लाने की दिशा में कोई पहल करते हैं, तो वे राजनीतिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर उसका समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या विपक्ष और स्वतंत्र टिप्पणीकारों का रुख सरकार के प्रति बदल रहा है।
अपनी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ध्रुव राठी ने सिर्फ चुनावी सुधारों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि हालिया राजनीतिक घटनाओं पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने हाल ही में हुए सीजेपी (सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के प्रदर्शन और खुद को हिरासत में लिए जाने के पूरे वाकये पर विस्तार से चर्चा की। राठी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश्वर कुमार और पूरी प्रणाली के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और पत्रकार को अपनी बात रखने का पूरा हक मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों को लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में रहकर जांचने की मांग की और पुलिस कार्रवाई पर भी तीखे सवाल खड़े किए।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल और निष्पक्षता की मांग
भारत में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर पिछले कुछ सालों से लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन लंबे समय से यह मांग करते आ रहे हैं कि आयोग के सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए ताकि सत्ता पक्ष का उस पर सीधा दबाव न रहे। ध्रुव राठी ने इसी5 मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि चुनाव कराने वाली संस्था पूरी तरह निष्पक्ष दिखे और काम करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद उन कमियों से है जो आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर से भरोसा डिगा सकती हैं।
राठी ने अपने संबोधन में यह भी जोड़ा कि यदि देश के प्रधानमंत्री खुद आगे आकर चुनाव आयोग की पारदर्शिता बढ़ाने और उसके सुधार के लिए कोई बड़ा कानून या कदम लाते हैं, तो एक जागरूक नागरिक और मीडियाकर्मी होने के नाते वे इस बात की सराहना करेंगे। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक एक सकारात्मक और परिपक्व दृष्टिकोण के रूप में देख रहे हैं, जहां मुद्दों के आधार पर समर्थन या विरोध की बात की जा रही है। हालांकि, सत्ता पक्ष के समर्थकों ने इस बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है और राठी के पुराने वीडियो का हवाला देते हुए उनकी नीयत पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रेस की आजादी और पत्रकारों के अधिकारों पर मंडराता संकट
इस बीच, देश में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा भी लगातार तूल पकड़ रहा है। हाल ही में प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस की बदसलूकी और मीडिया पर बढ़ते दबाव को लेकर कई जाने-माने कार्टूनिस्टों और संपादकों ने तीखे व्यंग्य किए हैं। कार्टूनिस्ट कीर्तीश भट्ट के बनाए गए हालिया कार्टून में मीडिया की स्वतंत्रता और पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ा प्रहार किया गया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जानकारों का मानना है कि आज के दौर में स्वतंत्र पत्रकारिता करना और सच सामने लाना बेहद चुनौतीभरा हो गया है, जहां हर कदम पर कानूनी और प्रशासनिक बंदिशों का सामना करना पड़ता है।
दूसरी तरफ, देश की क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़े उलटफेर के दावे किए जा रहे हैं। शिवसेना के शिंदे गुट के 35 विधायकों के टूटने की खबर और सांसद संजय राउत के बड़े दावों ने महाराष्ट्र की सियासत में फिर से हलचल पैदा कर दी है। इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई विशेष अपील जैसे कई अन्य राजनीतिक घटनाक्रम भी समानांतर रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं। लेकिन इन सबके बीच ध्रुव राठी का चुनाव आयोग सुधारों पर दिया गया यह बयान सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा है और लोग इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
स्वतंत्र और डिजिटल मीडिया की बदलती भूमिका
आज के डिजिटल युग में पारंपरिक मीडिया के अलावा स्वतंत्र डिजिटल क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स की भूमिका बहुत बड़ी हो गई है। ध्रुव राठी जैसे चेहरे जब इस मंच से चुनाव आयोग और देश की बड़ी संस्थाओं में सुधार की बात करते हैं, तो उसका असर सीधे तौर पर देश के करोड़ों युवाओं और मतदाताओं पर पड़ता है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम जनता भी अब यह चाहती है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र और मजबूत हों ताकि लोकतंत्र की नींव पर किसी भी तरह का आंच न आए। राठी का यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में बहस का एक नया केंद्र बन सकता है, जहां सुधारों की मांग और मुखर होने की उम्मीद है।







