नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजधानी दिल्ली में आज सियासत का पारा पूरी तरह आसमान पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के तमाम बड़े नेता सड़क पर उतर आए हैं। सुबह से ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद इस मेगा प्रोटेस्ट की कमान संभाल रखी है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई जगह बैरिकेडिंग भी लगाई गई है।
इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कांग्रेस की खास रणनीति के तहत हुई है जिसे पार्टी हलकों में लंच पॉलिटिक्स कहा जा रहा है। सुबह के शुरुआती सत्र में नेताओं ने संसद परिसर और पार्टी दफ्तर में बैठकर आगे की रणनीति बनाई। इसके बाद दोपहर होते-होते सभी नेता सीधे जंतर-मंतर की तरफ मार्च करते हुए निकल पड़े। राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के कई सांसद और दूसरे दलों के बड़े नेता भी इस मार्च में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश के लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है और जनता इसे अब बर्दाश्त नहीं करेगी।
जंतर-मंतर पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन और लंच के बाद की रणनीति
दोपहर का भोजन करने के बाद राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसद एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सड़कों पर उतर आए हैं। लंच ब्रेक के बाद प्रोटेस्ट ने और ज्यादा आक्रामक रूप ले लिया है। देश के दूसरे राज्यों से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने की खबरें लगातार आ रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का साफ कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि देश के संविधान को बचाने की लड़ाई है। पुलिस और सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी तरह की अनहोनी न हो। कार्यकर्ताओं में भारी जोश देखा जा रहा है और वे लगातार सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह आंदोलन तब तक थमने वाला नहीं है जब तक कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की जितनी कोशिश की जाएगी, विरोध उतना ही तेज होगा। पिछले कुछ दिनों से चुनावी निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है। इसी नाराजगी के चलते आज देशव्यापी प्रदर्शन का यह बड़ा ऐलान किया गया था जिसका असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है।
देशभर में फैला विरोध और प्रशासन की कड़ी चौकसी
दिल्ली के अलावा देश के कई अन्य राज्यों और बड़े शहरों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और दक्षिण के कुछ राज्यों से भी विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें सामने आ रही हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने हर जगह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित न हो। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक की भी खबरें हैं, लेकिन स्थिति को फिलहाल नियंत्रण में बताया जा रहा है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के इस आक्रामक तेवर से आने वाले दिनों में राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा बढ़ने के पूरे आसार हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए है। जंतर-मंतर पर मौजूद आम लोगों और छोटे कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इस लड़ाई में अपने नेताओं के साथ पूरी ताकत से खड़े हैं। देश के राजनीतिक गलियारों में इस समय सिर्फ और सिर्फ इसी महाप्रदर्शनी की चर्चा हो रही है। जैसे-जैसे शाम ढलती जाएगी, इस आंदोलन का अगला रुख क्या होगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। संसद से लेकर सड़क तक गूंज रही इन आवाजों ने एक बार फिर केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
आगे की राजनीतिक चाल और संसद का आगामी सत्र
इस बड़े विरोध प्रदर्शन का असर संसद के कामकाज पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। विपक्षी दल संसद के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोग की स्वायत्तता को लेकर विपक्ष लगातार श्वेत पत्र की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन आने वाले समय में एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। कांग्रेस पार्टी ने यह भी संकेत दे दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो देश के हर जिले और ब्लॉक स्तर पर ऐसे प्रदर्शन किए जाएंगे।
आम जनता के बीच भी इस पूरे विवाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां समर्थक इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक कामकाज पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। बहरहाल, दिल्ली की सड़कों पर गरमाई सियासत इस बात की गवाही दे रही है कि आने वाले दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए ही बेहद कड़े इम्तिहान वाले होने वाले हैं।







