नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट इन दिनों खेल के मैदान पर अपनी मेहनत के दम पर चर्चा का बड़ा केंद्र बने हुए हैं। 4390 दिनों के लंबे अंतराल के बाद टीम इंडिया में वापसी करने वाले इस खिलाड़ी ने साबित कर दिया है कि लगन हो तो उम्र और मुश्किलें मायने नहीं रखतीं। घरेलू क्रिकेट के लंबे सफर और अनगिनत पसीने की बूंदों के बाद उन्हें यह दूसरा मौका मिला है। इस वापसी ने उन सभी खिलाड़ियों को नई उम्मीद दी है जो लंबे समय से टीम से बाहर रहकर भी हार नहीं मानते हैं।
उनादकट की इस कहानी का एक बड़ा हिस्सा इंग्लैंड की पिचों पर लिखा गया है जहां उन्होंने काउंटी क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया। ससेक्स टीम की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी सटीक लाइन और लेंथ से बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। मैदान पर उनकी धारदार गेंदबाजी ने विरोधी टीम के खेमा में हलचल मचा दी और अपनी टीम को कई मौकों पर शानदार जीत दिलाई। उनके इसी खेल ने चयनकर्ताओं का ध्यान एक बार फिर से उनकी ओर खींचा।
इंग्लैंड की धरती पर पूरे किए 500 विकेट
काउंटी क्रिकेट के दौरान जयदेव उनादकट ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल करते हुए अपने करियर के 500 विकेट पूरे कर लिए। इंग्लैंड की मुश्किल परिस्थितियों में जहां स्विंग और सीम गेंदबाजों को मदद मिलती है, उनादकट ने अपनी काबिलियत का पूरा इस्तेमाल किया। ससेक्स के लिए मैच के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने अपनी घातक गेंदबाजी से विरोधी बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी। उनके इन पांच सौ विकटों का सफर इस बात का सबूत है कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका अनुभव कितना अमूल्य है।
ससेक्स टीम को जीत दिलाने में उनादकट की भूमिका बेहद अहम रही है क्योंकि उन्होंने अकेले दम पर कई अहम साझेदारियों को तोड़ा। जब भी टीम को विकेट की जरूरत पड़ी, कप्तान ने गेंद उनके हाथ में सौंपी और उन्होंने निराश नहीं किया। मैच के दूसरे दिन ही उनकी गेंदबाजी के दम पर ससेक्स ने जीत की तरफ मजबूत कदम बढ़ा लिए थे। उनके इस प्रदर्शन की तारीफ इंग्लैंड के खेल विशेषज्ञों ने भी खुलकर की है।
लंबे संघर्ष के बाद मिला दूसरा मौका
भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का उनका यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है क्योंकि इतने लंबे समय तक इंतजार करना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से कठिन होता है। उम्र के इस पड़ाव पर आकर जब कई खिलाड़ी संन्यास के बारे में सोचते हैं, तब उनादकट ने अपनी फिटनेस और खेल को और बेहतर बनाया। घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र की टीम का नेतृत्व करते हुए उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और रणजी ट्रॉफी में अपनी टीम को चैंपियन बनाया।
उनके इस घरेलू प्रदर्शन को आखिरकार राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने नजरअंदाज नहीं किया और उन्हें टीम में शामिल किया गया। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ी के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है कि मेहनत का फल देर से ही सही लेकिन जरूर मिलता है। भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी उनके आने से तेज गेंदबाजी आक्रमण को एक अनुभवी और भरोसेमंद विकल्प मिला है।
ससेक्स के लिए आगे भी संभालेंगे गेंदबाजी का जिम्मा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयदेव उनादकट आने वाले समय में एक बार फिर इंग्लैंड लौटेंगे और ससेक्स के लिए काउंटी चैंपियनशिप में खेलेंगे। काउंटी क्रिकेट का यह अनुभव उनके खेल को और अधिक परिपक्व बना रहा है जिसका फायदा उन्हें और भारतीय क्रिकेट दोनों को मिल रहा है। विदेशी पिचों पर खेलने से गेंदबाजों को अपनी तकनीक में सुधार करने का जो मौका मिलता है, उसका पूरा लाभ उनादकट उठा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ होता है कि जयदेव उनादकट केवल एक खिलाड़ी नहीं बल्कि जिद और कभी हार न मानने वाले जज्बे का दूसरा नाम बन चुके हैं। उनके तरकश में अनुभव के जो तीर हैं, वे आने वाले मुकाबलों में भारतीय टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि उनका यह सुनहरा दौर अभी और लंबा चलेगा और वे देश के लिए कई और मैच जिताऊ प्रदर्शन करेंगे।







