नई दिल्ली से द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट — राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित जंतर-मंतर पर एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी संगठन की ओर से आगामी 10 अक्टूबर को एक बड़े प्रोटेस्ट का आह्वान किया गया था। लेकिन तय तारीख नजदीक आते ही इस आयोजन पर बड़ा प्रशासनिक संशय खड़ा हो गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे ने इस निर्धारित प्रदर्शन के लिए अभी तक कोई औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। इस बीच अन्य कई राजनीतिक और सामाजिक हलचलें भी देश के अलग-अलग हिस्सों में समानांतर रूप से चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
देश के कई हिस्सों में इस समय बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम एक साथ सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहां दिल्ली में जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर असमंजस की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब में ओएसडी से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कड़ा रुख अपना रखा है। सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर में नामजद सभी लोगों को पूछताछ के लिए नए समन जारी किए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन कार्रवाइयों को सीधे तौर पर आने वाले समय में होने वाले चुनावों से जोड़कर देखा है। उनका साफ कहना है कि राजनीतिक मंशा के तहत ऐसी कार्रवाइयां चुनाव के ठीक पहले तेज की जा रही हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के क्या हैं कारण?
राजधानी दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस प्रशासन बेहद सतर्क रुख अपनाता नजर आ रहा है। जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 और सुरक्षा के कड़े इंतजामों का हवाला दिया जा रहा है। सीजेपी संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस थानों और जिला प्रशासन की तरफ से अब तक हरी झंडी नहीं मिल पाई है। बिना अनुमति के यदि किसी प्रकार का जमावड़ा होता है, तो पुलिस तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।
मैदान पर मौजूद हमारे संवाददाताओं ने पाया कि जंतर-मंतर के आसपास पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियां भी इस बात की टोह ले रही हैं कि यदि अनुमति नहीं मिलती है, तो क्या संगठन के लोग अचानक वहां इकट्ठा होने का प्रयास करेंगे। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि शहर में किसी भी तरह की ट्रैफिक जाम या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही पुख्ता बंदोबस्त कर लिए गए हैं। आयोजकों और पुलिस के बीच बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अंतिम परिणाम अभी तक सकारात्मक नहीं निकला है।
विभिन्न राज्यों में सुलगते सियासी और प्रशासनिक मुद्दे
राष्ट्रीय राजधानी के इस विरोध प्रदर्शन के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी जनता और नेताओं के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ है। इस वीडियो में ग्रामीण इलाके के लोग एक भारतीय जनता पार्टी के विधायक को खरी-खोटी सुनाते हुए नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि समाजवादी पार्टी अच्छा काम करेगी, तो वे भविष्य में उसे ही अपना वोट देंगे। इस तरह की जमीनी प्रतिक्रियाएं राजनीतिक दलों की धड़कनों को बढ़ाने के लिए काफी मानी जा रही हैं।
इन तमाम घटनाओं के बीच आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रशासन नरम रुख अपनाएगा या नहीं। सीजेपी के नेतृत्व में होने वाले इस प्रोटेस्ट का भविष्य अब पूरी तरह से प्रशासनिक अनुमतियों और अदालती रुख पर निर्भर करता नजर आ रहा है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया आधिकारिक बयान सामने आएगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।
प्रशासनिक सख्ती और आयोजकों की अगली रणनीति
विरोध प्रदर्शनों के इतिहास में जंतर-मंतर हमेशा से एक प्रमुख केंद्र रहा है, जहां देश भर से लोग अपनी आवाज बुलंद करने आते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से स्थानीय निकाय और पुलिस प्रशासन ने यहां प्रदर्शनों के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। सीजेपी के आयोजकों का दावा है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज और आवेदन समय पर जमा करा दिए थे। इसके बावजूद अंतिम समय तक फाइल को लटकाए रखना उनकी लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश जैसा प्रतीत होता है।
दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि सुरक्षा कारणों और वीवीआईपी मूवमेंट के चलते हर आवेदन को मंजूरी देना संभव नहीं होता है। यदि भीड़ अनियंत्रित होती है तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। यही वजह है कि अनुमति देने से पहले कई स्तरों पर खुफिया रिपोर्ट तैयार की जाती है। अब देखना यह होगा कि 10 अक्टूबर से पहले क्या कोई बीच का रास्ता निकलता है या फिर यह प्रदर्शन पूरी तरह से टालना पड़ता है।










