कोलकाता के ऐतिहासिक साल्टलेक स्टेडियम में फुटबॉल का बुखार एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैदान पर देश की दो सबसे पुरानी और पारंपरिक टीमों के बीच खिताबी जंग देखने को मिली। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के बीच खेला गया यह मैच हमेशा की तरह बहुत कड़ा और तनावपूर्ण रहा। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। खेल के शुरुआती मिनटों से ही दोनों तरफ से आक्रामक खेल का नजारा देखने को मिला। दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में हर एक मूव पर फैंस का शोर गूंज रहा था। मैदान पर खिलाड़ियों की फुर्ती और तकनीक देखने लायक थी।
मैच का सबसे बड़ा और निर्णायक पल खेल के एक अहम मोड़ पर आया। मोहन बागान के खिलाड़ी जेल्जकोविच ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए गोल दाग दिया। इस एक गोल ने खेल की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी। ईस्ट बंगाल के डिफेंस ने बचाव की पूरी कोशिश की लेकिन वे इस हमले को रोक नहीं पाए। जेल्जकोविच के इस शानदार गोल के बाद मोहन बागान के खेमे में जश्न का माहौल बन गया। स्टेडियम में मौजूद मोहन बागान के समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गोल खाने के बाद ईस्ट बंगाल की टीम ने बराबरी करने के लिए लगातार हमले किए लेकिन सफलता नहीं मिली।
साल्टलेक में मोहन बागान का दबदबा कायम
इस जीत के साथ ही मोहन बागान ने इतिहास के पन्नों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। टीम ने रिकॉर्ड 22वीं बार प्रतिष्ठित आईएफए शील्ड का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह जीत क्लब के इतिहास और उसके करोड़ों फैंस के लिए बहुत मायने रखती है। ईस्ट बंगाल जैसी मजबूत टीम को फाइनल मुकाबले में हराना आसान नहीं होता है। मोहन बागान के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन और बेहतरीन खेल का परिचय दिया। सेमीफाइनल मुकाबले में पंजाब एफसी को कड़े संघर्ष और पेनल्टी शूटआउट में हराने के बाद टीम फाइनल में पहुंची थी। फाइनल में भी खिलाड़ियों ने उसी जोश और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर कदम रखा।
इस खिताबी जीत के बाद कोलकाता की सड़कों पर फुटबॉल प्रेमियों का जश्न शुरू हो गया। पिछले पचास सालों में यह एक दुर्लभ मौका है जब क्लब ने ऐसा बड़ा कारनामा किया है। फुटबॉल पंडित इसे मोहन बागान के लिए एक ऐतिहासिक सत्र मान रहे हैं। हाल ही में कलकत्ता फुटबॉल लीग यानी सीएफएल जीतने के बाद यह दूसरी बड़ी सफलता है। पचास साल के लंबे अंतराल के बाद डबल धमाका करते हुए एक ही सीजन में दो बड़े खिताब जीतना बड़ी बात है। क्लब प्रबंधन और कोच ने इस सफलता का पूरा श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत को दिया है।
मैदान पर खिलाड़ियों का कड़ा संघर्ष
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। रैफरी को कई बार फाउल रोकने के लिए सीटी बजानी पड़ी और खिलाड़ियों को चेतावनी भी दी गई। ईस्ट बंगाल के फारवर्ड खिलाड़ियों ने कई बार मोहन बागान के गोलपोस्ट पर हमला बोला। लेकिन मोहन बागान के गोलकीपर और रक्षापंक्ति ने दीवार बनकर हर हमले को नाकाम कर दिया। मैदान पर खिलाड़ियों का पसीना और दर्शकों का उत्साह खेल की असली खूबसूरती बयां कर रहा था। मैच के अंतिम पलों में तनाव और बढ़ गया जब ईस्ट बंगाल ने बराबरी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
तय समय की समाप्ति तक स्कोर मोहन बागान के पक्ष में 1-0 ही रहा। जैसे ही मैच खत्म होने की सीटी बजी, मोहन बागान के खिलाड़ी मैदान पर खुशी से झूम उठे। सब्सटिट्यूट खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ भी दौड़कर मैदान पर आ गए। हार के बाद ईस्ट बंगाल के खेमे में निराशा छा गई लेकिन उन्होंने अपने जुझारू खेल से सबका दिल जीता। कोलकाता फुटबॉल का यह महामुकाबला एक बार फिर साबित कर गया कि शहर में इस खेल का क्रेज आज भी कम नहीं हुआ है।
फुटबॉल प्रेमियों के बीच जश्न का माहौल
मैच के बाद सोशल मीडिया से लेकर कोलकाता की गलियों तक सिर्फ मोहन बागान की ही चर्चा हो रही है। खेल प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के टूर्नामेंट भारतीय घरेलू फुटबॉल को नई ऊर्जा देते हैं। युवा खिलाड़ियों को इन बड़े मुकाबलों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आने वाले दिनों में दोनों टीमों को कई और घरेलू टूर्नामेंटों में हिस्सा लेना है। लेकिन फिलहाल मोहन बागान के समर्थक इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने में डूबे हुए हैं। क्लब के दफ्तर के बाहर आतिशबाजी की गई और मिठाइयां बांटी गईं। मैदान से लेकर बाहर तक हर तरफ लाल और मैरून रंगों का ही कब्जा दिखाई दे रहा है।








