नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था में अब बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों के बाद केंद्र सरकार और एजेंसी पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इन गंभीर सवालों और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए अब एनटीए के पूरे ढांचे में सुधार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने खुद यह जानकारी दी है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की चूक दोबारा न हो सके।
सुरक्षा के मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब परीक्षा केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ को सौंपा जा रहा है। इसके साथ ही डिजिटल नकल और गड़बड़ियों को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा दिया गया है। परीक्षा हॉल के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम एक्टिव किए जा रहे हैं जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ लेंगे। पेपर छपाई से लेकर छात्रों तक उसके पहुंचने के सफर को भी पूरी तरह से गोपनीय और डिजिटल ट्रैक पर लाया जा रहा है ताकि किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ की गुंजाइश न बचे।
जेईई मेन और नीट परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव की तैयारी
सुरक्षा के साथ-साथ परीक्षा के स्वरूप और सिलेबस में भी अहम फेरबदल किए जा रहे हैं। आने वाले सत्र के लिए जेईई मेन के सिलेबस में कुछ जरूरी बदलाव किए गए हैं ताकि छात्रों पर से अनावश्यक दबाव कम हो सके और पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाए। वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि भविष्य की परीक्षाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए इसे पूरी तरह से सीबीटी यानी कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में कराने पर भी गंभीरता से विचार चल रहा है। ऑनलाइन परीक्षा होने से ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या पेपर लीक होने जैसी संभावनाओं पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।
दूसरी तरफ, एनटीए ने अपनी आगामी परीक्षाओं का नया कैलेंडर भी जारी कर दिया है। साल 2026-27 के लिए जारी इस परीक्षा कैलेंडर में जेईई मेन, यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट समेत कुल चौदह बड़ी परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। इस समयबद्ध कैलेंडर से लाखों छात्रों को अपनी तैयारी करने का सही मौका मिलेगा और परीक्षा तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति पूरी तरह खत्म हो जाएगी। एजेंसी का दावा है कि नया शेड्यूल छात्रों के एकेडमिक सत्र को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है ताकि परिणाम समय पर घोषित हो सकें।
पेपर लीक के आरोपियों पर सख्ती और कानूनी कार्रवाई
परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार फैलाने वाले लोगों के खिलाफ भी अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में एक बड़े आरोपी के बेटे को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा पास कराने और प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए पांच लाख रुपये का लेन-देन हुआ था। इन पुख्ता सबूतों और जांच के आधार पर एनटीए ने सख्त कदम उठाते हुए आरोपी के बेटे को अगले दो साल तक कोई भी परीक्षा देने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है ताकि अन्य लोगों के लिए एक कड़ा संदेश जाए।
जमीनी स्तर पर छात्रों और अभिभावकों के बीच इन बदलावों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्र संगठनों का मानना है कि सीआईएसएफ की तैनाती और एआई मॉनिटरिंग से व्यवस्था में सुधार तो होगा, लेकिन असल परीक्षा इन नियमों को जमीन पर सख्ती से लागू करने की होगी। कोचिंग सेंटरों के छात्रों का कहना है कि बार-बार बदलते नियमों और पेपर लीक के डर से उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए सरकार और एनटीए को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए सत्र की सभी परीक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी माहौल में संपन्न हों।
परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए भविष्य की रणनीति
आने वाले दिनों में एनटीए केवल परीक्षाओं के आयोजन तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था की भी गहन समीक्षा करेगी। केंद्र सरकार की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति लगातार उन सभी कमियों को दूर करने में जुटी है जिनकी वजह से पिछली परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आई थीं। अधिकारियों का कहना है कि हर परीक्षा केंद्र पर जैमर लगाने से लेकर बायोमेट्रिक अटेंडेंस को और ज्यादा पुख्ता किया जा रहा है ताकि फर्जी परीक्षार्थी की जगह कोई दूसरा व्यक्ति परीक्षा में शामिल न हो सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो गया है कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर है और इस बार एजेंसी कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। हालांकि असली सफलता तभी मिलेगी जब ये तमाम कागजी दावे और सुरक्षा इंतजाम धरातल पर पूरी ईमानदारी से लागू होंगे। छात्र और अभिभावक अब सिर्फ वादों पर नहीं बल्कि पारदर्शी नतीजों पर भरोसा करना चाहते हैं, और आने वाले परीक्षा परिणाम ही यह तय करेंगे कि एनटीए का यह नया सुरक्षा कवच कितना कारगर साबित हुआ है।





