वाशिंगटन/नई दिल्ली — अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले वैश्विक राजनीति में एक बार फिर बड़ा तनाव पैदा हो गया है। पेंटागन ने अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमलों की तैयारी करने के स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी तमाम रणनीतिक तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि यह हमला कब और किस वक्त किया जाएगा, लेकिन सेना को हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह चौकस रहने को कहा गया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम को घरेलू राजनीतिक समीकरणों और मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका में आगामी मिड-टर्म चुनावों से पहले इस तरह के सैन्य आदेश जारी होना विश्लेषकों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल ने वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को भी किसी भी आपात स्थिति के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मिड-टर्म चुनावों से पहले अचानक क्यों तेज हुई हलचल?
अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि किसी भी बाहरी सैन्य संघर्ष का असर घरेलू चुनावों पर सीधा पड़ता है। ट्रंप प्रशासन और पेंटागन के इस कदम को ईरान की तरफ से लगातार बढ़ रही क्षेत्रीय गतिविधियों और परमाणु वार्ताओं में आ रहे गतिरोध का जवाब माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए मिड-टर्म चुनावों से पहले अपनी मजबूत छवि पेश करना चाहता है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी करना केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है, ताकि ईरान को किसी भी आक्रामक कदम से रोका जा सके।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका की इस सैन्य तैयारी पर कड़ी आपत्ति जताई है। ईरानी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देश किसी भी बाहरी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी इस संभावित टकराव को लेकर गहरी चिंता का माहौल है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल जैसे देश इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। क्षेत्रीय शांति और तेल आपूर्ति बाधित होने के डर से पड़ोसी देश कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशों में जुट गए हैं, ताकि युद्ध के हालात से बचा जा सके।
अमेरिकी सेना और पेंटागन की आगे की क्या है रणनीति?
पेंटागन के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में अपने नौसैनिक और वायुसेना के बेड़े को मजबूत करना शुरू कर दिया है। विमानवाहक पोतों और आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को रणनीतिक ठिकानों पर तैनात किया जा रहा है। सैन्य कमांडरों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी अचानक आए आदेश पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए अपनी यूनिट्स को तैयार रखें। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भले ही हमले की तारीख अभी तय न हो, लेकिन इतनी बड़ी तैयारी का मतलब है कि वॉशिंगटन हर विकल्प खुला रखना चाहता है।
आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि क्या यह महज एक राजनीतिक पैंतरा है या फिर सचमुच किसी बड़े युद्ध की शुरुआत होने वाली है। दुनिया भर के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट में इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों के जरिए साफ दिखाई देने लगा है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही पेंटागन या व्हाइट हाउस की तरफ से कोई नया आधिकारिक अपडेट सामने आएगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।








